वैज्ञानिकों से मिलते रक्षा समिति के अध्यक्ष।

दुश्मन की पनडुब्बियों का काल! भारत ने विकसित किया स्वदेशी ‘सोनार’, समुद्री सीमा की सुरक्षा में बड़ी कामयाबी

रक्षा क्षेत्र में भारत आत्मनिर्भरता की ओर एक कदम और आगे बढ़ गया है। भारतीय नौसेना अब स्वदेश में तैयार रक्षा प्रणाली से देश की समुद्री सीमा की रक्षा करेगी। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) नौसेना के लिए विकसित अत्याधुनिक अंडरवाटर सेंसर और सोनार प्रणाली डेवलेप की है। दरअसल, रक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति (SCOD) 17 से 22 जनवरी 2026 के बीच कोच्चि, बेंगलुरु, भुवनेश्वर और वाराणसी के आधिकारिक दौरे पर है। निरीक्षण के दौरान समिति ने हल-माउंटेड सोनार, टोएड एरे सोनार जैसी प्रणालियों के डेमो देखे, जो पनडुब्बियों और युद्धपोतों की पनडुब्बी रोधी क्षमता (ASW) को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। समिति ने कहा कि ये तकनीकें समुद्री सुरक्षा, निगरानी और रणनीतिक बढ़त के लिए अत्यंत आवश्यक हैं और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती देती हैं।

रक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति (SCoD) ने शुक्रवार को अध्यक्ष राधा मोहन सिंह के नेतृत्व में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की कोच्चि स्थित प्रमुख प्रयोगशाला—नेवल फिजिकल एंड ओशनोग्राफिक लेबोरेटरी (NPOL)—का दौरा किया। इस दौरान समिति ने भारतीय नौसेना के लिए विकसित अत्याधुनिक अंडरवाटर सेंसर और सोनार प्रणालियों के लाइव प्रदर्शन देखे और स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं की सराहना की।

17 से 22 जनवरी के बीच विभिन्न स्थानों पर प्रस्तावित निरीक्षण पर निकली समिति का कोच्चि स्थित NPOL पर विशेष फोकस है। NPOL में समिति को लैब के अनुसंधान एवं विकास (R&D) प्रयासों, परियोजनाओं की प्रगति और नौसेना के परिचालन पर इनके प्रभाव के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों ने समिति को सोनार सिस्टम, सिग्नल प्रोसेसिंग, ट्रांसड्यूसर और अंडरवाटर सेंसर से जुड़ी स्वदेशी तकनीकों के बारे में प्रस्तुति दी। DRDO और NPOL के वैज्ञानिकों ने नौसेना की जरूरतों के अनुरूप स्वदेशी प्रणालियों का विकास देश की समुद्री सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान कर रहा है।

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