सब्जी-दूध ही नहीं, अब ब्लिंकिट बचा रहा है जान! दिल्ली में बुजुर्ग महिला के लिए ‘देवदूत’ बनी 6 मिनट वाली एंबुलेंस सेवा

नई दिल्ली | न्यूजस्टिच

आज के डिजिटल युग में क्विक कॉमर्स ऐप्स (Quick Commerce Apps) ने हमारी जीवनशैली को पूरी तरह बदल दिया है। जिस ऐप का इस्तेमाल हम रोजाना 10 मिनट में सब्जी, दूध या किराने का सामान मंगवाने के लिए करते हैं, अब वही ऐप लोगों की जान बचाने का जरिया भी बन रहा है। देश की राजधानी दिल्ली से एक ऐसा ही दिल छू लेने वाला मामला सामने आया है, जहां ब्लिंकिट (Blinkit) की त्वरित सेवा ने एक बुजुर्ग महिला को मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया।

जब थमने लगी थीं दादी की सांसें

यह घटना दिल्ली के रहने वाले शिवम के घर की है। सुबह करीब 8 बजे उनकी दादी अचानक घर में गिर पड़ीं। परिवार में हड़कंप मच गया। दादी बेहोश थीं, हालांकि उनका दिल धड़क रहा था, लेकिन शरीर में कोई हलचल नहीं थी। शिवम ने तुरंत आपातकालीन नंबर 112 पर कॉल किया, लेकिन व्यस्तता के कारण एंबुलेंस आने में देरी हो रही थी। घर की स्थिति नाजुक होती जा रही थी और हर बीतता सेकंड भारी पड़ रहा था।

ब्लिंकिट का ‘6 मिनट एंबुलेंस’ फीचर बना वरदान

तभी शिवम को याद आया कि उन्होंने हाल ही में ब्लिंकिट ऐप पर ‘Ambulance in 6 Minutes’ का एक नया फीचर देखा था। बिना समय गंवाए उन्होंने ऐप खोला और एंबुलेंस के लिए रिक्वेस्ट डाल दी। शिवम बताते हैं कि रिक्वेस्ट डालते ही महज 1 मिनट के भीतर उनके पास कन्फर्मेशन कॉल आ गया। इसके ठीक 4 से 6 मिनट के भीतर एक हाई-टेक एंबुलेंस उनके घर के दरवाजे पर खड़ी थी।

एंबुलेंस में ही मिला जीवनदान

एंबुलेंस में मौजूद दो प्रशिक्षित नर्सों ने फौरन दादी की जांच शुरू की। जांच में पता चला कि दादी का ब्लड शुगर लेवल खतरनाक स्तर (40 तक) गिर चुका था। यह एक मेडिकल इमरजेंसी थी। नर्सों ने तुरंत एंबुलेंस के भीतर ही ड्रिप चढ़ानी शुरू की। चिकित्सकीय सहायता मिलते ही करीब 10 मिनट में दादी को होश आ गया। इसके बाद उन्हें सुरक्षित रूप से अस्पताल पहुंचाया गया, जहां अब उनकी हालत स्थिर है।

फीस जानकर दंग रह गया परिवार

जब स्थिति सामान्य हुई, तो शिवम ने एंबुलेंस सेवा के शुल्क के बारे में पूछा। उन्हें लगा कि इतनी तेज और आधुनिक सेवा के लिए मोटी रकम चुकानी होगी। लेकिन ब्लिंकिट की टीम की ओर से जो जवाब मिला, उसने उन्हें चौंका दिया। उन्हें बताया गया कि ब्लिंकिट की तरफ से यह इमरजेंसी सेवा पूरी तरह निशुल्क (Free) है।शिवम ने अपना यह अनुभव सोशल मीडिया पर साझा किया है ताकि अधिक से अधिक लोगों को ब्लिंकिट की इस ‘पैनिक सिचुएशन’ वाली सर्विस के बारे में पता चल सके। यह घटना साबित करती है कि यदि तकनीक का सही दिशा में इस्तेमाल किया जाए, तो वह समाज के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

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