पति का नेत्रदान करने के दौरान मौजूद निभा देवी।

पति की अंतिम विदाई पर पत्नी का वो फैसला, जिसने मौत के मातम को बनाया ‘महादान’! मिट्टी में मिलने से पहले ‘अमर’ हो गई आंखें

पति की मृत्यु के साथ पत्नी के भी प्राण त्यागने की खबरें तो आपने अक्सर सुनी और पढ़ी होंगी, लेकिन पति की मृत्यु के बाद उनकी दोनों आंखों का दान कराने के लिए यह कहते शायद ही किसी को सुना होगा कि ‘मेरे पति के दोनों नेत्रों का दान कर दो, इससे मुझे बहुत खुशी होगी’। दरअसल, गुरुवार को शहर के मिलनपारा स्टेशन रोड, खुशकीबाग निवासी निभा देवी के पति देवनारायण महतो का 72 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे बीते 15 दिनों से बीमार चल रहे थे। उनकी मृत्यु के उपरांत निभा देवी ने अपने मृत पति का नेत्रदान कराने की इच्छा जताई और अपने पुत्र अमित को ‘दधीचि देहदान समिति’ से संपर्क करने को कहा।

देवनारायण महतो की पत्नी निभा देवी इस निर्णय पर परिवार के कुछ सदस्य असहज भी हुए, लेकिन निभा देवी ने गर्व के साथ कहा कि उनके पति की आंखों का दान होने पर उन्हें हर्ष होगा। इसके बाद अमित ने डॉ. अनिल कुमार गुप्ता और रवीन्द्र साह की टीम से संपर्क किया, जिसके बाद देवनारायण महतो का नेत्रदान संपन्न हो सका। बता दें कि देवनारायण महतो जिले के 18वें नेत्रदानी बने हैं।

देवनारायण महतो से पूर्व बुधवार को दधीचि देहदान समिति ने गढ़बनैली के सौंपा गांव में एक सेवानिवृत्त शिक्षक का मरणोपरांत नेत्रदान कराया। विदित हो कि 21 जनवरी को सौंपा निवासी शिक्षक अखिलेश आनंद के पिता, सेवानिवृत्त शिक्षक अंचित लाल दास का 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। उनके निधन के बाद पुत्र अखिलेश आनंद ने पिता के नेत्रों का दान कराया। दोनों ही मृतकों का नेत्रदान कटिहार मेडिकल कॉलेज से आई टीम ने संपन्न किया। इस टीम में डॉ. अभिनव, डॉ. अभिषेक, डॉ. ईरा, डॉ. शुभम, डॉ. शमा, डॉ. आतिफ, डॉ. अविनाश और डॉ. फरहिना शामिल थीं।

दोनों बुजुर्गों के निधन पर दधीचि देहदान समिति के प्रांतीय उपाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने शोक के साथ उनका आभार भी जताया है। उन्होंने कहा कि मृतकों के परिजनों ने जो कार्य किया है वह सबसे महान है। इस अवसर पर हीना सईद, रवींद्र साह और ‘ग्रीन पूर्णिया’ संस्था के सदस्यों ने शोक व्यक्त किया है।

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