बिहार की सियासत में रविवार को उस वक्त हलचल तेज हो गई जब राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने एक बड़ा सांगठनिक फेरबदल करते हुए तेजस्वी यादव को पार्टी का ‘राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष’ नियुक्त किया। लालू प्रसाद यादव के इस फैसले के बाद एनडीए (NDA) खेमे से तीखी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव ने इस नियुक्ति को ‘परिवारवाद’ का चरम बताते हुए आरजेडी के भविष्य पर सवाल खड़े किए हैं।
चिराग पासवान का प्रहार: ‘हार के बाद भी इतना बड़ा ईनाम क्यों?’
लोजपा (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने तेजस्वी यादव की नियुक्ति पर तंज कसते हुए आरजेडी की हालिया विफलताओं को कुरेदा। उन्होंने कहा, “आरजेडी को ऐतिहासिक हार मिली है, फिर भी नेतृत्व में कोई बदलाव नहीं हुआ। तेजस्वी यादव लालू प्रसाद यादव के पुत्र हैं, इसलिए पार्टी की कमान उन्हीं के हाथों में जानी थी, यह पहले से तय था। चिराग ने आगे कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक पार्टी में पद प्रदर्शन के आधार पर दिए जाते हैं, लेकिन आरजेडी में प्रदर्शन चाहे जैसा भी हो, पद परिवार के सदस्यों के लिए ही सुरक्षित हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह नियुक्ति साबित करती है कि आरजेडी आज भी एक परिवार तक ही सीमित है और कार्यकर्ताओं की हैसियत वहां गौण है।
रामकृपाल यादव की चुटकी: ‘कार्यकर्ता क्या संतुष्ट रहेंगे?’
वहीं, बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व में लालू यादव के करीबी रहे रामकृपाल यादव ने तेजस्वी को शुभकामनाओं के साथ-साथ कड़ा संदेश भी दिया। उन्होंने कहा, “तेजस्वी को शुभकामनाएं, लेकिन मुझे नहीं लगता कि इससे राजद का कुछ भला होने वाला है। रामकृपाल यादव ने लालू परिवार की आंतरिक कलह और रोहिणी आचार्य के हालिया बयानों पर भी निशाना साधा। उन्होंने रोहिणी की ‘पीड़ा’ का जिक्र करते हुए कहा, “जिस परिवार में खुद बेटी ही संतुष्ट नहीं रह सकती, वहां आम कार्यकर्ता की संतुष्टि की उम्मीद कैसे की जा सकती है? आरजेडी अब समाप्ति की ओर है, जो थोड़ा-बहुत बचा-खुचा है, उसे तेजस्वी संभाल लें तो बड़ी बात होगी।
सियासी मायने: ‘मजबूती या मजबूरी?’
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लालू प्रसाद यादव ने अपनी बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य कारणों के मद्देनजर तेजस्वी को आधिकारिक रूप से नंबर दो की कुर्सी सौंपी है। हालांकि, विरोधियों ने इसे ‘विरासत के हस्तांतरण’ का नाम देकर आगामी चुनावों के लिए घेराबंदी शुरू कर दी है। अब देखना यह है कि तेजस्वी यादव कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर कार्यकर्ताओं का कितना भरोसा जीत पाते हैं और एनडीए के ‘परिवारवाद’ वाले हमले का जवाब कैसे देते हैं।

