बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून को लेकर अक्सर बहस होती रहती है, लेकिन बक्सर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने इस कानून के मानवीय पहलू को उजागर कर दिया है। उत्पाद विभाग की एक नियमित जांच टीम ने शराब के नशे में एक शख्स को हिरासत में लिया, लेकिन जब उसकी शिनाख्त हुई तो अधिकारी दंग रह गए। वह शख्स कोई अपराधी नहीं, बल्कि एक ऐसा बेटा था जो पिछले 8 सालों से अपने परिवार के लिए ‘मृत’ मान लिया गया था।
नियमित जांच से खुला राज
बुधवार को उत्तर प्रदेश-बिहार सीमा पर स्थित वीर कुंवर सिंह चेकपोस्ट पर उत्पाद विभाग की टीम वाहनों की सघन तलाशी ले रही थी। इसी दौरान टीम ने सुधीर दास नामक एक व्यक्ति को शराब के नशे में पाया। हिरासत में लेने के बाद जब कागजी कार्रवाई और पते का सत्यापन (Verification) शुरू हुआ, तो सुधीर ने अपना घर समस्तीपुर जिले के मरीचा गांव बताया। बक्सर उत्पाद विभाग ने जब समस्तीपुर के स्थानीय अधिकारियों से संपर्क साधा, तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। रिकॉर्ड के अनुसार, सुधीर दास पिछले आठ वर्षों से लापता था और उसके परिवार ने उसकी तलाश में जमीन-आसमान एक कर दिया था।
परिवार में खुशी और गम का माहौल
सूचना मिलते ही सुधीर के पिता ज्ञानी दास और स्थानीय पार्षद गुरुवार को बक्सर पहुंचे। अपने बेटे को आठ साल बाद जिंदा सामने देख पिता की आंखों से आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। हालांकि, यह मिलन जितना सुखद था, उतना ही दर्दनाक भी। इन आठ वर्षों में सुधीर का पूरा संसार बदल चुका था। ज्ञानी दास ने बताया कि जब सुधीर लापता हुआ था, तब वह शादीशुदा था और उसका दो साल का एक मासूम बच्चा भी था। सालों तक सुधीर की खोजबीन की गई, विज्ञापन छपवाए गए, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। अंततः थक-हार कर और सुधीर को मृत मानकर, उसकी पत्नी अपने मायके लौट गई और करीब चार साल पहले उसने दूसरी शादी कर ली।
खामोशी और गुमनामी के साल
सात भाइयों में चौथे नंबर का सुधीर बचपन से ही शांत और अंतर्मुखी स्वभाव का था। उसकी मां की मौत 17 साल पहले बिजली का करंट लगने से हो गई थी, जिसके बाद वह और भी चुप रहने लगा था। पुलिस और परिजनों के पूछने पर भी वह यह स्पष्ट नहीं कर पाया कि उसने घर क्यों छोड़ा था या वह इन आठ सालों में कहां-कहां रहा। उसने बस इतना बताया कि वह अलग-अलग शहरों में दिहाड़ी मजदूरी और छोटे-मोटे काम करके अपना पेट पाल रहा था।
पुलिस का बयान
बक्सर के उत्पाद अधीक्षक अशरफ जमाल ने इस घटना पर खुशी जताते हुए कहा, “हमारा काम कानून का पालन कराना है, लेकिन इस कार्रवाई ने जो सुखद परिणाम दिया है, वह हमारे विभाग के लिए हमेशा यादगार रहेगा। एक परिवार का बिखराव रुक गया और एक पिता को उसका बेटा वापस मिल गया। फिलहाल कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद सुधीर को उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है। यह घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है कि कैसे एक ‘गिरफ्तारी’ ने उजड़े हुए परिवार में फिर से रोशनी भर दी।

