बिहार के दरभंगा जिले से एक ऐसा कानूनी मामला सामने आया है जिसने पुलिसिया कार्यप्रणाली और सामाजिक ताने-बाने पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र के हरिनगर गांव में एक विवाद के बाद दर्ज हुई प्राथमिकी (FIR) चर्चा का विषय बनी हुई है, क्योंकि इसमें गांव के लगभग पूरे ब्राह्मण समुदाय को ही अभियुक्त बना दिया गया है।
एक FIR और आरोपियों की लंबी फेहरिस्त
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इस मामले में 70 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि 100 से 150 अज्ञात व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है। स्थानीय रिपोर्टों की मानें तो यह संख्या 210 तक पहुँच रही है। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि FIR में उन लोगों के नाम भी शामिल हैं जो वर्षों से दिल्ली, मुंबई और अन्य शहरों में नौकरी या मजदूरी कर रहे हैं और घटना के दिन गांव में मौजूद ही नहीं थे।
विवाद की जड़: मजदूरी का बकाया और खूनी झड़प
घटना की शुरुआत वित्तीय लेनदेन के विवाद से हुई। शिकायतकर्ता अशर्फी पासवान ने पुलिस को दिए आवेदन में बताया कि उनके बेटे विक्रम पासवान की लगभग ₹2.5 लाख की मजदूरी हेमंत झा और अन्य लोगों पर बकाया थी।
- 30 जनवरी: विवाद को सुलझाने के लिए पंचायत बुलाई गई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।
- 31 जनवरी: आरोप है कि अगली सुबह जब विक्रम घर लौट रहा था, तब उस पर लाठी-डंडे और लोहे की रॉड से हमला किया गया।
- गंभीर आरोप: शिकायत में मारपीट के साथ-साथ चोरी और जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल (SC/ST एक्ट) का भी जिक्र है। इस झड़प में दोनों पक्षों के लगभग 10 लोग घायल बताए जा रहे हैं।
SC/ST एक्ट और कानूनी पेच
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम सहित कई संगीन धाराओं में केस दर्ज किया है। हालांकि, सामूहिक नामजदगी ने इस केस को विवादित बना दिया है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि बिना प्राथमिक जांच के इतनी बड़ी संख्या में लोगों को नामजद करना जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है।
पुलिस की कार्रवाई और वर्तमान स्थिति
कुशेश्वरस्थान पुलिस ने अब तक इस मामले में 12 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे दर्ज आवेदन के आधार पर कार्रवाई कर रहे हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर FIR की कॉपी वायरल होने के बाद प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। ग्रामीण और कई सामाजिक संगठन अब इस मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं ताकि निर्दोष लोगों को इस कानूनी जाल से निकाला जा सके।
सामाजिक प्रतिक्रिया: सन्नाटे में गांव
हरिनगर गांव में वर्तमान में भारी तनाव और सन्नाटा है। एक साथ इतने लोगों पर मुकदमा दर्ज होने से गांव के आर्थिक और सामाजिक जीवन पर बुरा असर पड़ा है। लोग इसे ‘कानूनी प्रतिशोध’ की संज्ञा दे रहे हैं, वहीं पुलिस का दावा है कि जांच के बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

