गुनाहगार मां, मासूम मेहमान! जहानाबाद जेल की कोठरी में ‘नन्ही परी’ की एंट्री, नियम जानकर रह जाएंगे दंग

मखदुमपुर थाना क्षेत्र के इक्कील गांव निवासी बसंती, जो पिछले आठ महीनों से हत्या के एक मामले में ‘मंडल कारा काको’ में बंद है, मंगलवार की रात एक स्वस्थ बच्ची की माँ बनी। जेल की दीवारों के बीच मातृत्व का यह सुख न केवल बसंती के लिए भावुक पल रहा, बल्कि जेल प्रशासन की तत्परता की भी मिसाल बना।

जेल में बंद रहने के दौरान जब बसंती की तबीयत बिगड़ी, तो चिकित्सकीय जांच में उसके गर्भवती होने की पुष्टि हुई। जेल अधीक्षक के निर्देश पर उसे नियमित स्वास्थ्य सुविधाएं दी जा रही थीं। मंगलवार की रात अचानक प्रसव पीड़ा शुरू होने पर जेल प्रशासन ने बिना देरी किए उसे पुलिस अभिरक्षा में जहानाबाद सदर अस्पताल पहुँचाया। सदर अस्पताल की महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. नाहिद शिरीन ने बताया कि बसंती की ‘नॉर्मल डिलीवरी’ हुई है और जच्चा-बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के तहत उसे 48 घंटे निगरानी में रखा जाएगा, जिसके बाद उसे पुनः जेल भेज दिया जाएगा।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने आर.डी. उपाध्याय बनाम स्टेट ऑफ आंध्र प्रदेश मामले में जेलों में बंद गर्भवती महिलाओं और उनके बच्चों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

  1. स्वास्थ्य और आहार संबंधी सुविधाएं
    • नियमित जांच: गर्भवती महिला बंदी को जेल के भीतर और बाहर नियमित प्रसवपूर्व (Antenatal) जांच की सुविधा मिलती है।
    • पौष्टिक आहार: जेल मैनुअल के अनुसार, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं को अतिरिक्त कैलोरी, फल, दूध और आवश्यक पोषक तत्व प्रदान किए जाते हैं।
    • चिकित्सा सहायता: प्रसव के समय महिला को अस्पताल पहुँचाना और वहाँ उचित देखभाल सुनिश्चित करना जेल प्रशासन की जिम्मेदारी है।
  2. बच्चों के लिए जेल में अधिकार
    • माँ के साथ रहने का अधिकार: भारत में कानूनन एक महिला कैदी अपने बच्चे को 6 वर्ष की आयु तक जेल में अपने साथ रख सकती है।
    • शिक्षा और क्रेच: 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए जेल के भीतर क्रेच और नर्सरी शिक्षा की व्यवस्था अनिवार्य है।
    • टीकाकरण: जेल प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होता है कि बच्चे का समय पर पूर्ण टीकाकरण हो।

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