जब अनिल अग्रवाल ने हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड (HZL) को अधिग्रहित किया था, तब कइयों ने इसे एक ‘घाटे का सौदा’ कहा था। पुराने सिस्टम, धीमी फाइलें और मुरझाए हुए हौसले—यह उस वक्त की हकीकत थी। लेकिन अनिल अग्रवाल के पास वह पारखी नज़र थी, जो मिट्टी के नीचे दबे सोने को पहचानती थी। आज वही कंपनी दुनिया की सबसे बड़ी जिंक सप्लायर बन चुकी है।
राजस्थान की मिट्टी और महाराणा प्रताप का जज्बा
अनिल अग्रवाल इस सफलता का श्रेय खुद को नहीं, बल्कि राजस्थान की माटी और वहां के लोगों की मेहनत को देते हैं। वे कहते हैं कि यह महाराणा प्रताप और मीराबाई की धरती है। यहां के लोग स्वाभिमानी और मेहनती हैं। इसी भरोसे का नतीजा है कि आज हिंदुस्तान जिंक भारत की 75% जिंक की जरूरत पूरी करता है। उत्पादन 10 गुना बढ़ चुका है। जहां कभी चांदी का नामोनिशान नहीं था, आज भारत हर साल सैकड़ों टन सिल्वर पैदा कर रहा है। प्रतिदिन लगभग 55 करोड़ रुपये टैक्स और डिविडेंड के रूप में देश की झोली में जा रहे हैं।
बिहार की गलियों से लंदन के बोर्डरूम तक: कौन हैं अनिल अग्रवाल?
अनिल अग्रवाल का जन्म बिहार की राजधानी पटना में हुआ था। उनके पिता एक छोटा सा एल्यूमीनियम कंडक्टर का व्यवसाय करते थे। पटना के मिलर हाई स्कूल से पढ़ाई करने वाले अनिल अग्रवाल 15 साल की उम्र में करियर बनाने के लिए हाथ में एक छोटा सूटकेस लेकर मुंबई चले गए थे। वहां उन्होंने कबाड़ (Scrap) का काम शुरू किया। बिना किसी डिग्री और अंग्रेजी न बोल पाने के बावजूद, अपनी लगन और बिहार की ‘जुझारू मिट्टी’ के दम पर उन्होंने दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक संसाधन साम्राज्य खड़ा किया।
जीवन का सबसे बड़ा दुख: बेटे की मौत
सफलता के इस शिखर पर पहुँचने के बावजूद अनिल अग्रवाल का जीवन संघर्षों और दुखों से अछूता नहीं रहा। उनके जीवन का सबसे बड़ा और गहरा जख्म उनके बेटे की मृत्यु थी। अनिल अग्रवाल के बेटे अग्नि अग्रवाल का एक सड़क हादसे में निधन हो गया था। इस घटना ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया था, लेकिन उन्होंने इस दुख को अपनी ताकत बनाया और समाज सेवा की ओर मुड़ गए। उन्होंने संकल्प लिया कि वे अपनी संपत्ति का 75% हिस्सा दान करेंगे, ताकि किसी भी बच्चे को शिक्षा और पोषण की कमी न हो।
एक लाख रोजगार और नया भारत
आज हिंदुस्तान जिंक सिर्फ एक कंपनी नहीं, बल्कि एक लाख से ज्यादा परिवारों की रोजी-रोटी का जरिया है। पिछले साल ही इस कंपनी ने सरकार को 20,000 करोड़ रुपये दिए। यह कहानी बताती है कि अगर नीयत साफ हो और अपने लोगों पर भरोसा हो, तो भारत का एक ‘पुराना प्लांट’ भी पूरी दुनिया को रास्ता दिखा सकता है।
यूजर ने अनिल अग्रवाल को बताया ‘आधुनिक भारत का शिल्पकार’
अनिल अग्रवाल की इस भावुक पोस्ट पर हजारों लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। सोशल मीडिया यूजर्स ने न केवल उनकी व्यावसायिक समझ की तारीफ की, बल्कि उनके व्यक्तिगत संघर्ष को भी सलाम किया। यूजर संजय सिंह ने अनिल अग्रवाल के जज्बे को सलाम करते हुए लिखा जिंदगी में हार न मानना कोई आपसे सीखे। दुनिया की सबसे बड़ी आपदा (पुत्र वियोग) आपके जीवन में घटी, लेकिन फिर भी आपने खुद को चट्टान की तरह मजबूत बनाए रखा। आपका यह व्यक्तित्व करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा है।
नेतृत्व और विजन की जीत
हिंदुस्तान जिंक से जुड़े लक्ष्मण देवांगन ने लिखा आपका यह संदेश न केवल HZL की यात्रा को दर्शाता है, बल्कि यह साबित करता है कि जब नेतृत्व में विजन और लोगों पर भरोसा हो, तो असंभव भी संभव हो जाता है। आपने राजस्थान की मेहनतकश प्रतिभा को वैश्विक पहचान दिलाई है। हमें इस परिवर्तन का हिस्सा होने पर गर्व है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों की भावुक अपील एक कर्मचारी के पुत्र घनश्याम मेनारिया ने कंपनी के प्रति अपना लगाव जाहिर करते हुए एक मार्मिक अपील की महोदय, मेरे पिता इस प्रतिष्ठित संस्था के सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं। उन्होंने अपने जीवन के बहुमूल्य वर्ष कंपनी को दिए हैं। सेवानिवृत्त कर्मचारी ही किसी संस्था की नींव होते हैं, जिनके परिश्रम से आज कंपनी इस ऊँचाई पर है। आपसे विनम्र अनुरोध है कि उनके सम्मान और अधिकारों को सदैव प्राथमिकता दें। आपकी यह पहल वर्तमान कर्मचारियों के लिए भी प्रेरणा बनेगी।
अर्थशास्त्र और राष्ट्र निर्माण
ललित परिहार ने देश की प्रगति से जोड़ते हुए लिखा कि सर, आप जैसे लीडर्स की बदौलत ही भारत हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए शास्त्र और शस्त्र जितने जरूरी हैं, उतना ही मजबूत अर्थशास्त्र और व्यवसाय भी जरूरी है।

