14 फरवरी को पूर्णिया के गौरवशाली स्थापना दिवस से ठीक एक दिन पहले बिहार सरकार ने जिलेवासियों को एक शानदार प्रशासनिक तोहफा दिया है। जिले की बढ़ती आबादी और अपराध की बदलती चुनौतियों को देखते हुए सरकार ने पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) यानी SP Rural के नए पद के सृजन को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद अब पूर्णिया पुलिस महकमे के पास ‘डबल इंजन’ की शक्ति होगी।
क्यों पड़ी ग्रामीण एसपी की जरूरत?
पूर्णिया न केवल बिहार का सबसे पुराना जिला है, बल्कि यह सीमांचल का सामरिक केंद्र भी है। जिले का भौगोलिक विस्तार काफी बड़ा है और इसकी सीमाएं पश्चिम बंगाल से सटी हुई हैं। अब तक एक ही पुलिस अधीक्षक के लिए शहरी और सुदूर ग्रामीण इलाकों की एक साथ मॉनिटरिंग करना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा था। नए पद के आने से अब ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिसिंग अधिक समर्पित और प्रभावी हो सकेगी।
इन तीन अनुमंडलों पर रहेगा ग्रामीण एसपी का नियंत्रण
नए आदेश के अनुसार, पूर्णिया के तीन महत्वपूर्ण अनुमंडलों और उनके अंतर्गत आने वाले 16 से अधिक थानों की जिम्मेदारी अब ग्रामीण एसपी के हाथों में होगी:
- बायसी अनुमंडल: सीमावर्ती और संवेदनशील क्षेत्र होने के कारण यहाँ विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अंतर्गत बायसी, डगरूआ, अमौर, रौटा और अनगढ़ थाना क्षेत्र शामिल हैं।
- धमदाहा अनुमंडल: जिले के इस बड़े हिस्से के धमदाहा, मीरगंज, रूपौली, बड़हारा, रघुवंशनगर, भवानीपुर, बलिया, अकबरपुर और मोहनपुर थानों की मॉनिटरिंग अब ग्रामीण एसपी करेंगे।
- बनमनखी अनुमंडल: इस क्षेत्र के जानकीनगर और सरसी थाना क्षेत्रों को भी नए पद के कार्यक्षेत्र में जोड़ा गया है।
शहरी क्षेत्र में क्या बदलेगा?
प्रशासनिक स्पष्टता के लिए यह तय किया गया है कि अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) सदर-1 और सदर-2 के अंतर्गत आने वाले शहरी थाना क्षेत्र इस नए पद के दायरे से बाहर रहेंगे। वे पूर्व की भांति जिला पुलिस अधीक्षक (Main SP) के अधीन ही कार्य करेंगे।
तेजी से होगा कांडों का निष्पादन
इस नए पद के सृजन से उम्मीद जताई जा रही है कि बायसी, धमदाहा और बनमनखी जैसे इलाकों में पुलिस की सक्रियता बढ़ेगी। अलग अधिकारी होने से पेंडिंग केसों का निष्पादन तेजी से होगा और अपराधियों पर नकेल कसना आसान हो जाएगा। स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर आए इस फैसले से पूरे जिले में हर्ष का माहौल है।

