कॉर्पोरेट जगत के दिग्गज और वेदांता समूह के संस्थापक अनिल अग्रवाल ने इस वैलेंटाइन डे को एक साधारण उत्सव के बजाय अपनी जीवनसंगिनी किरन अग्रवाल के प्रति ‘कृतज्ञता दिवस’ के रूप में मनाया। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने 50 साल के रिश्ते की परतों को खोलते हुए बताया कि कैसे एक सफल साम्राज्य खड़ा करने के पीछे एक महिला का धैर्य और निस्वार्थ प्रेम छिपा होता है।
लॉन्ग-डिस्टेंस से लेकर मुंबई की भागदौड़ तक
अग्रवाल ने अपनी यादों के झरोखे से वह दौर साझा किया जिसे आज की पीढ़ी ‘लॉन्ग-डिस्टेंस रिलेशनशिप’ कहती है। उन्होंने बताया कि शादी के शुरुआती 20 साल वे अलग-अलग शहरों में रहे। उस दौर में न तो वीडियो कॉल की सुविधा थी और न ही इंस्टेंट मैसेजिंग। महीनों तक बातचीत का जरिूुया सिर्फ इंतजार हुआ करता था। उन्होंने एक मार्मिक किस्सा याद करते हुए लिखा कि कैसे किरन एक हाथ में भारी सूटकेस और दूसरे हाथ में एक साल के बेटे अग्निवेश को लेकर अकेले मुंबई आ गई थीं, ताकि वे कुछ पल साथ बिता सकें। यह संघर्ष उस समय का था जब कामयाबी की मंजिल अभी दूर थी।

पुत्र वियोग का असहनीय दर्द और एक-दूसरे का सहारा
इस संदेश का सबसे भावुक हिस्सा वह था जहाँ उन्होंने अपने बेटे अग्निवेश अग्रवाल को खोने के दुख का जिक्र किया। अनिल अग्रवाल ने लिखा, “इस साल वक्त ने हमसे वह छीन लिया जिसकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकती। बच्चे को खोने से बड़ा कोई दर्द नहीं होता। उन्होंने स्वीकार किया कि सफलता के शिखर पर होने के बावजूद, एक पिता के रूप में वे टूटे हुए हैं। लेकिन इस कठिन घड़ी में भी दोनों ने एक-दूसरे का हाथ थामे रखा है। उन्होंने बताया कि वे दोनों अब धीरे-धीरे एक-दूसरे को संभालने की कोशिश कर रहे हैं।
दोस्ती और हिम्मत की दास्तां
अनिल अग्रवाल ने किरन को अपनी ‘सबसे अच्छी दोस्त’ और ‘ताकत’ बताते हुए कहा कि धूप हो या छांव, किरन हमेशा उनके साथ खड़ी रहीं। यह पोस्ट न केवल एक प्रेम पत्र है, बल्कि उन सभी जोड़ों के लिए एक सीख भी है जो मुश्किल वक्त में बिखर जाते हैं। अनिल अग्रवाल की यह पोस्ट साबित करती है कि जीवन की असली पूंजी शेयर बाजार के आंकड़े नहीं, बल्कि वह जीवनसाथी है जो सबसे गहरे दुख में भी आपका हाथ थामे खड़ा रहे।

