पटना के मसौढ़ी में मैट्रिक की परीक्षा में प्रवेश न मिलने से आहत छात्रा कोमल कुमारी की आत्महत्या का मामला आज बिहार विधान परिषद में गरमा गया। विपक्षी दल राजद की एमएलसी उर्मिला ठाकुर और सत्ता पक्ष के वरिष्ठ सदस्य नवल किशोर यादव ने इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार की ‘कठोर’ नीतियों और परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए।
5 मिनट की देरी और जान का सौदा: उर्मिला ठाकुर
आरजेडी एमएलसी उर्मिला ठाकुर ने सदन में इस दुखद घटना का जिक्र करते हुए कहा कि महज 5-10 मिनट की देरी के कारण एक होनहार बेटी को परीक्षा में बैठने नहीं दिया गया, जिससे आहत होकर उसने जान दे दी। उन्होंने पूछा कि क्या नियमों की सख्ती किसी बच्चे की जिंदगी से बढ़कर है? उन्होंने मांग की कि जिन छात्राओं की परीक्षा ट्रैफिक या अन्य कारणों से छूट गई है, उनके लिए सरकार विशेष परीक्षा (Re-Exam) का आयोजन करे।
ट्रैफिक समस्या और ‘होम सेंटर’ की मांग: नवल किशोर यादव
भाजपा एमएलसी नवल किशोर यादव ने भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि दूर-दराज परीक्षा केंद्र भेजने के कारण छात्र-छात्राओं को गंभीर ट्रैफिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने तर्क दिया:
- ट्रैफिक जाम की हकीकत: परिवहन और जाम की समस्या के कारण अगर छात्रा 5-10 मिनट लेट होती है, तो इसमें उसकी क्या गलती है?
- होम सेंटर का विकल्प: नवल किशोर यादव ने मांग की कि भविष्य में छात्राओं के लिए ‘होम सेंटर’ (अपने ही स्कूल या नजदीकी केंद्र) की व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि उन्हें लंबी दूरी तय न करनी पड़े।
सरकार ने लिया संज्ञान: सभापति
सदन में हंगामे और सदस्यों की चिंता को देखते हुए सभापति ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने सदन को सूचित किया कि “सरकार ने इस मामले को संज्ञान में लिया है और इस पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।”
क्या था मामला?
ज्ञात हो कि मसौढ़ी के खरजमा की कोमल कुमारी मंगलवार को बरनी केंद्र पर महज 10 मिनट की देरी से पहुंची थी। गेट नहीं खोले जाने और करियर बर्बाद होने के डर से आहत होकर उसने नदौल के पास चलती ट्रेन से कूदकर अपनी जान दे दी थी। इस घटना के बाद से ही पूरे राज्य में बिहार बोर्ड की सख्ती और संवेदनहीनता को लेकर आक्रोश व्याप्त है।

