औरंगाबाद। न्यूजस्टिच
बिहार के न्यायिक इतिहास में एक विरले और कड़े फैसले के तहत औरंगाबाद की एक अदालत ने जिला समाहरणालय (कलेक्ट्रेट) को कुर्क करने का आदेश दिया है। सिविल जज (सीनियर डिवीजन) प्रथम, डॉ. दीवान फहद की अदालत ने यह सख्त रुख एक पुराने ‘इजराय वाद’ (Execution Case) में डिक्री का अनुपालन न करने और बकाया राशि का भुगतान न होने के कारण अपनाया है। इस आदेश के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा मामला?
यह कानूनी विवाद अधिवक्ता हरेकृष्ण प्रसाद के बकाया भुगतान से जुड़ा है। अदालत द्वारा पूर्व में पारित एक डिक्री (न्यायिक निर्णय) के तहत प्रशासन को अधिवक्ता को एक निश्चित राशि का भुगतान करना था। लंबे समय से इस डिक्री का पालन नहीं किया जा रहा था, जिसके खिलाफ अधिवक्ता ने 15 अक्टूबर 2025 को अदालत में आवेदन दायर किया था। न्यायालय ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया क्योंकि यह ‘प्राचीनतम वाद’ की श्रेणी में आता है। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के स्पष्ट निर्देश हैं कि ऐसे पुराने मामलों का त्वरित निष्पादन (Execution) किया जाए, लेकिन प्रशासन की ओर से लगातार लापरवाही बरती गई।
प्रशासनिक टालमटोल और कोर्ट की नाराजगी
अदालती अभिलेखों के अनुसार, 14 नवंबर 2025 को इस मामले में कारण पृच्छा (Show Cause) नोटिस जारी किया गया था। इसके जवाब में अपर समाहर्ता और जिला विधि शाखा के कार्यालय से 9 दिसंबर 2025 को एक प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, लेकिन उसमें डिक्री राशि के भुगतान को लेकर कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं था। इसके बाद, सरकारी अधिवक्ता (GP) की ओर से 11 दिसंबर 2025 और 5 फरवरी 2026 को समय की मांग की गई थी। अदालत ने पर्याप्त समय दिया, लेकिन बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद राशि का भुगतान नहीं किया गया। अदालत ने इसे न्याय प्रक्रिया में बाधा और डिक्रीधारी के अधिकारों का हनन माना।
कुर्की और नीलामी की प्रक्रिया
बुधवार को सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने कड़ा रुख अपनाते हुए समाहरणालय (DM ऑफिस) की संपत्ति को कुर्क करने का निर्देश दिया। व्यवहार न्यायालय के नाजिर को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे नियमानुसार संपत्ति को कुर्क कर 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करें। अधिवक्ता पक्ष का कहना है कि यदि 15 दिनों के भीतर भुगतान सुनिश्चित नहीं होता है, तो कुर्की के बाद समाहरणालय की नीलामी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी ताकि डिक्री की राशि वसूली जा सके। मामले की अगली सुनवाई अब 9 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है।
प्रशासन का पक्ष
इस अभूतपूर्व आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए DM अभिलाषा शर्मा ने कहा कि वे इस आदेश का अध्ययन करवा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले की बारीकियों को देखा जाएगा और न्यायालय के आदेश के आलोक में उचित कानूनी कदम उठाए जाएंगे। यह मामला शासन और न्यायपालिका के बीच समन्वय और अदालती आदेशों के सम्मान की दिशा में एक बड़ा उदाहरण बन गया है। अब सबकी नजरें 9 मार्च की सुनवाई पर टिकी हैं।
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