रामायण देखते उद्योगपति अनिल अग्रवाल।

मैनेजमेंट गुरु हैं प्रभु श्रीराम….अनिल अग्रवाल ने युवाओं को दी बड़ी सीख, कहा-उलझनें, दबाव और असफलताएं आना जरूरी

कुछ समय पहले ऑफिस में एक युवा कर्मी ने बताया कि टीवी पर रामानंद सागर की रामायण आज भी प्रसारित हो रही है। उस युवाकर्मी से यह सुनकर बहुत ही अच्छा लगा कि आज के बदलते दौर में जहां ओटीटी और शॉर्ट वीडियो का चलन बढ़ गया है, वहीं युवा पीढ़ी भी इसे उसी श्रद्धा और उत्साह के साथ देख रही है, जैसा कभी उनके माता-पिता ने देखा था।

भगवान राम का जीवन केवल एक पौराणिक कथा नहीं, बल्कि हर पीढ़ी के लिए एक संपूर्ण जीवन दर्शन है। जब राम ने अयोध्या का त्याग किया, तब वे केवल अयोध्या के राजकुमार थे। लेकिन 14 वर्षों के वनवास, संघर्ष और कठिन तप के बाद जब वे लौटे, तो वे मर्यादा पुरुषोत्तम राम बन चुके थे।

यह परिवर्तन हमें जीवन का सबसे बड़ा सबक सिखाता है। अयोध्या से श्रीलंका तक की उनकी यात्रा वास्तव में स्वयं को गढ़ने की यात्रा थी। यह हमें बताता है कि जीवन में आने वाली उलझनें, दबाव और असफलताएं हमें रोकने के लिए नहीं, बल्कि हमें तराशने के लिए आती हैं।

आज के प्रतिस्पर्धी युग में युवा अक्सर मानसिक दबाव और असफलता के डर से घिर जाते हैं। उनके लिए रामायण का संदेश बहुत सरल और स्पष्ट है: “मुश्किलें आपको तोड़ने के लिए नहीं, बल्कि आपको बनाने के लिए आती हैं।”

  • धैर्य (Patience): विपरीत परिस्थितियों में भी शांत रहकर सही निर्णय लेना।
  • मूल्य (Values): सफलता के लिए अपने सिद्धांतों से समझौता न करना।
  • विकास (Growth): हर चुनौती को एक अवसर के रूप में देखना।

रामायण आज के समय में पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है। भगवान राम ने दिखाया कि एक आदर्श पुत्र, भाई और राजा कैसा होना चाहिए। उनका जीवन सिखाता है कि महानता सुख-सुविधाओं में नहीं, बल्कि कर्तव्यों के पालन और चरित्र की शुचिता में निहित है। अतः, यदि आज का युवा रामायण देख रहा है, तो वह केवल एक धारावाहिक नहीं देख रहा, बल्कि वह अपने जीवन की उलझनों का समाधान खोज रहा है। राम तब भी मार्गदर्शक थे, और वे आज भी अंधेरे में प्रकाश स्तंभ की तरह अडिग खड़े हैं।

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