सदन में गरजे पूर्व IPS और विधायक आनंद मिश्रा: सिर्फ FIR होने से न रुके युवाओं की नौकरी, पुलिस सुधार के लिए दी बड़ी सलाह

पटना। न्यूजस्टिच
बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बक्सर से भाजपा विधायक आनंद मिश्रा ने युवाओं और पुलिस कार्यप्रणाली से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। पूर्व IPS अधिकारी होने के नाते मिश्रा ने व्यवस्था की उन खामियों पर चोट की, जो अक्सर निर्दोष युवाओं के करियर को तबाह कर देती हैं।

‘पड़ोसी की जलन’ और बर्बाद होता भविष्य

आनंद मिश्रा ने सदन में कहा कि ग्रामीण इलाकों में अक्सर आपसी रंजिश या पड़ोसी की जलन के कारण किसी पर भी FIR दर्ज करा दी जाती है। वर्तमान व्यवस्था में, यदि किसी युवा पर FIR हो जाती है, तो उसे ‘कैरेक्टर सर्टिफिकेट’ (चरित्र प्रमाण पत्र) मिलने में भारी दिक्कत आती है। इसके चलते वह किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करे या मेहनत करे, उसे सरकारी नौकरी से वंचित रहना पड़ता है।

दोषी साबित होने तक न छिपे अवसर

विधायक ने तर्क दिया कि सिर्फ FIR दर्ज होने को अपराध का पैमाना नहीं मानना चाहिए। उन्होंने मांग की कि किसी भी युवा की नौकरी सिर्फ प्राथमिकी (FIR) के आधार पर नहीं रुकनी चाहिए। मामले को ट्रायल पर जाना चाहिए और न्यायालय की प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए। यदि ट्रायल के बाद वह व्यक्ति दोषी (Convicted) पाया जाता है, तभी उसे सेवा से बर्खास्त या अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए।

पुलिस सुधार पर दिया जोर

आनंद मिश्रा ने पुलिसिंग के अपने लंबे अनुभव का हवाला देते हुए सिस्टम में व्यापक सुधारों की वकालत की। उन्होंने कहा कि पुलिस को जांच में अधिक निष्पक्ष और तकनीकी रूप से सक्षम होना चाहिए ताकि झूठे मुकदमों से किसी का जीवन खराब न हो।
आनंद मिश्रा के 3 प्रमुख सुझाव:

सिर्फ FIR को आधार मानकर कैरेक्टर सर्टिफिकेट न रोका जाए।

जब तक कोर्ट ‘Convicted’ (दोषी) करार न दे, तब तक नौकरी का अधिकार सुरक्षित रहे।

जांच प्रक्रिया में तकनीकी पारदर्शिता आए ताकि ‘पड़ोसी वाली रंजिश’ में निर्दोष न फंसे।

कौन हैं आनंद मिश्रा? 

बिहार की राजनीति में इन दिनों बक्सर के भाजपा विधायक आनंद मिश्रा अपने प्रखर बयानों और पुलिस सुधार की मांगों को लेकर चर्चा के केंद्र में हैं। पूर्व IPS अधिकारी रहे आनंद मिश्रा ने हाल ही में विधानसभा में युवाओं के कैरेक्टर सर्टिफिकेट और FIR से जुड़े गंभीर मुद्दे को उठाकर यह साबित कर दिया है कि वे केवल राजनेता नहीं, बल्कि व्यवस्था के जानकार भी हैं।

IPS की नौकरी छोड़ राजनीति में रखा कदम

मूल रूप से भोजपुर जिले के शाहपुर निवासी आनंद मिश्रा 2011 बैच के असम-मेघालय कैडर के IPS अधिकारी थे। असम में उग्रवाद के खात्मे और अपनी ‘सिंघम’ वाली छवि के कारण वे देश भर में लोकप्रिय हुए। हालांकि, बिहार की सेवा करने के संकल्प के साथ उन्होंने जनवरी 2024 में अपने पद से इस्तीफा दे दिया। 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद, उन्होंने हार नहीं मानी और 2025 के विधानसभा चुनाव में बक्सर सीट से भाजपा के टिकट पर शानदार जीत दर्ज की।

सदन में बने युवाओं की ढाल

आनंद मिश्रा ने सदन में कहा कि अक्सर आपसी रंजिश में झूठी FIR के कारण युवाओं का करियर बर्बाद हो जाता है। उन्होंने मांग की कि जब तक दोष सिद्ध न हो, तब तक किसी की नौकरी नहीं रुकनी चाहिए। एक पूर्व पुलिस अधिकारी द्वारा व्यवस्था की इस विसंगति पर सवाल उठाना बिहार के लाखों प्रतियोगी छात्रों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरा है।

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