पटना में आंध्र पुलिस का बड़ा एक्शन: फायर विभाग के IG सुनील कुमार नायक के घर छापेमारी, पूर्व सांसद को टॉर्चर करने के मामले में गिरफ्तारी की तैयारी

पटना। न्यूजस्टिच
बिहार की राजधानी पटना के पॉश इलाके में स्थित फायर विभाग के आईजी सुनील कुमार नायक के सरकारी आवास पर आज सुबह से ही गहमागहमी बनी हुई है। आंध्र प्रदेश पुलिस की एक विशेष टीम पटना पहुंची है और आईजी सुनील कुमार नायक के खिलाफ छापेमारी कर रही है। जानकारी के अनुसार, पुलिस टीम उन्हें गिरफ्तार करने के इरादे से आई है, क्योंकि इस मामले में उनकी जमानत (Bail) रद्द हो चुकी है।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद साल 2021 का है, जब सुनील कुमार नायक केंद्रीय प्रतिनियुक्ति (Central Deputation) पर थे और अपने मूल कैडर आंध्र प्रदेश में CID में तैनात थे। उसी दौरान उनके निर्देशन में नरसापुरम लोकसभा क्षेत्र के तत्कालीन सांसद के. रघुराम कृष्णा राजू को एक गंभीर आपराधिक मामले में गिरफ्तार किया गया था। पूर्व सांसद के. रघुराम कृष्णा राजू ने आरोप लगाया था कि हिरासत के दौरान सुनील कुमार नायक के इशारे पर सीआईडी की टीम ने उनके साथ बेरहमी से मारपीट की और उन्हें शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया। यह मामला इतना गंभीर था कि बाद में कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद आईजी सुनील कुमार नायक और अन्य के विरुद्ध IPC की धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

बेल टूटने के बाद बढ़ी मुश्किलें

सुनील कुमार नायक इस मामले में अब तक कानूनी राहत पर थे, लेकिन हाल ही में उनकी बेल (जमानत) टूट गई है। इसी के आधार पर आंध्र प्रदेश पुलिस ने उन्हें कस्टडी में लेने के लिए पटना में उनके सरकारी आवास पर छापेमारी की। पुलिस सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद उन्हें स्थानीय कोर्ट में पेश किया जाएगा।

ट्रांजिट रिमांड पर आंध्र ले जाने की तैयारी

नियमों के मुताबिक, आंध्र प्रदेश पुलिस की टीम उन्हें पटना की अदालत में पेश कर ‘ट्रांजिट रिमांड’ की मांग करेगी। कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद, पुलिस उन्हें सड़क या हवाई मार्ग से आंध्र प्रदेश ले जाएगी, जहां उनसे आगे की पूछताछ की जाएगी और कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप

बिहार कैडर में फायर विभाग जैसे महत्वपूर्ण पद पर तैनात एक आईजी रैंक के अधिकारी के घर दूसरे राज्य की पुलिस का इस तरह पहुंचना चर्चा का विषय बना हुआ है। इस छापेमारी ने एक बार फिर से पुलिस अधिकारियों की कार्यशैली और ‘हिरासत में हिंसा’ (Custodial Torture) जैसे गंभीर मुद्दों पर बहस छेड़ दी है।

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