बिहार में नए साल की शुरुआत के साथ ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ ने प्रशासनिक तंत्र को हाई अलर्ट पर ला दिया है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने रविवार (11 जनवरी 2026) को सभी जिलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों और वरिष्ठ अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं। 16 जनवरी से शुरू हो रही इस यात्रा के जरिए सीएम धरातल पर सरकारी योजनाओं की कड़ी पड़ताल करेंगे, जो बिहार की विकास राजनीति में नया टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है।
योजनाओं की जमीनी जांच पर जोर, जनता से सीधा संवाद
इस यात्रा का फोकस ग्रामीण और शहरी स्तर पर ‘प्रगति यात्रा’ व ‘सात निश्चय’ योजनाओं की वास्तविक प्रगति पर रहेगा। मुख्य सचिव के पत्र के मुताबिक, नीतीश कुमार प्रत्येक जिले में चार प्रमुख गतिविधियों में हिस्सा लेंगे: सीएम चल रही परियोजनाओं का ग्राउंड जीरो पर दौरा, नई विकास योजनाओं का आगाज, आम लोगों से प्रत्यक्ष मुलाकात और शिकायतें सुनना, और जिलास्तरीय प्रगति पर उच्चस्तरीय चर्चा। यह यात्रा न केवल योजनाओं की समीक्षा करेगी, बल्कि जनता की नब्ज पकड़ने का मौका भी देगी, जिससे सरकार को फीडबैक मिल सकेगा।
अधिकारियों पर सख्ती, DGP से लेकर DM तक की मौजूदगी जरूरी
यात्रा की गंभीरता बताते हुए मुख्य सचिव ने जवाबदेही तय कर दी है। समीक्षा बैठकों में DGP, अपर मुख्य सचिव या विभागीय सचिवों की उपस्थिति अनिवार्य होगी। अपरिहार्य कारणों पर ही जूनियर अधिकारी शामिल हो सकेंगे। सभी विभाग प्रमुखों को पहले से ही अपनी योजनाओं की गहन रिव्यू करने का आदेश दिया गया है। जिला प्रशासन को सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स और कार्यक्रम प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
राजनीतिक निहितार्थ: जनता की नब्ज टटोलेगी सरकार
बिहार की सियासत में यह यात्रा मील का पत्थर साबित हो सकती है। विपक्ष के आरोपों के बीच सीएम का जिला-दर-जिला दौरा विकास कार्यों की पारदर्शिता दिखाने का प्रयास है। प्रशासनिक अमला पहले से ही तैयारी में जुटा है, ताकि ‘समृद्धि यात्रा’ बिना किसी खटके के सफल हो सके।

