जनसांख्यिकी (Demography) में अस्वाभाविक बदलाव देश की संस्कृति, इतिहास और भूगोल के लिए सबसे बड़ा खतरा है। बिहार के अररिया में एसएसबी (SSB) की 52वीं बटालियन के नए बीओपी (BOP) भवन का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के इन शब्दों ने सीमावर्ती इलाकों में खलबली मचा दी है। शाह ने स्पष्ट कर दिया है कि सीमांचल को घुसपैठियों से मुक्त करना अब केंद्र की मोदी सरकार का सर्वोच्च संकल्प है।
हाई-लेवल कमेटी और ‘डेमोग्राफी मिशन’
अमित शाह ने घोषणा की है कि पूरे देश में हो रहे जनसांख्यिकीय बदलावों की गहन समीक्षा के लिए एक ‘उच्च स्तरीय समिति’ (High Power Demographic Mission) का गठन किया जाएगा। उन्होंने बंगाल, झारखंड और बिहार को इस समस्या से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र बताया। यह कमेटी न केवल बदलावों की रिपोर्ट तैयार करेगी, बल्कि इन्हें संतुलित करने के उपाय भी सरकार को सुझाएगी।

सीमा के 10 किमी दायरे में चलेगा ‘हंटर’
घुसपैठ रोकने के लिए गृहमंत्री ने एक सख्त ‘एक्शन प्लान’ का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारियों और पुलिस कप्तानों के साथ हुई बैठक में यह तय किया गया है कि अंतर्राष्ट्रीय सीमा से 10 किलोमीटर के भीतर जितने भी अवैध अतिक्रमण और निर्माण हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर हटाया जाएगा। सीमा पर बाड़ लगाने (Fencing) के काम में तेजी लाई जाएगी। अवैध धार्मिक निर्माणों और संदिग्ध गतिविधियों पर सीधी निगरानी रखी जाएगी।
2030 का लक्ष्य: जनादेश से पहले ‘सफाई’
अमित शाह ने बंगाल चुनाव के मद्देनजर बड़ा राजनीतिक दांव भी खेला। उन्होंने कहा कि बंगाल में भाजपा की सरकार बनते ही पहला काम बाड़ लगाना और एक-एक घुसपैठिये को बाहर करना होगा। उन्होंने संकल्प लिया कि 2030 तक भारत की धरती से सभी अवैध घुसपैठियों को निकाल बाहर किया जाएगा। शाह के अनुसार, ये घुसपैठिये न केवल देश की सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि गरीबों के अनाज और युवाओं के रोजगार पर भी डाका डाल रहे हैं।
सुरक्षा एजेंसियों के साथ ‘रणनीति’
तीन दिवसीय दौरे के दौरान शाह ने किशनगंज और अररिया में एसएसबी (SSB) अधिकारियों के साथ सुरक्षा परियोजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ के तहत सीमावर्ती गांवों के विकास और वहां के निवासियों को सुरक्षा का भरोसा दिलाया।

