एक्साइज केस मामले में आज राउज एवेन्यू कोर्ट में चल रही सुनवाई।

Ex CM अरविंद केजरीवाल पर आरोप होगा तय? एक्साइज मामले में कोर्ट सीबीआई को देगी आदेश, जानिए पूरा मामला

दिल्ली एक्साइज नीति (Excise Policy) से जुड़े सीबीआई (CBI) के मामले में आज राउज एवेन्यू कोर्ट में बड़ी हलचल है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक आज सुबह सवा दस बजे सुनवाई के लिए अदालत पहुंचे। विशेष न्यायाधीश जितेन्द्र सिंह आज इस मामले में आरोपियों के खिलाफ ‘आरोप तय’ (Framing of Charges) करने पर अपना आदेश सुनाएंगे। यह आदेश तय करेगा कि क्या इस मामले में नियमित ट्रायल (मुकदमा) शुरू होगा।

यह मामला साल 2021 में शुरू हुआ जब दिल्ली सरकार ने नई आबकारी नीति (2021-22) लागू की थी।

  • विवाद की शुरुआत: जुलाई 2022 में दिल्ली के तत्कालीन मुख्य सचिव ने एक रिपोर्ट सौंपी, जिसमें नीति के निर्धारण में प्रक्रियाओं के उल्लंघन और वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लगाए गए।
  • जांच का जिम्मा: उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने इस मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश की। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया। सितंबर 2022 में दिल्ली सरकार ने इस नीति को रद्द कर दिया।
  • आरोप: जांच एजेंसियों का आरोप है कि शराब नीति के जरिए निजी संस्थाओं को फायदा पहुंचाया गया और बदले में मिली रिश्वत (कथित तौर पर ₹100 करोड़) का इस्तेमाल गोवा चुनाव में किया गया।

इस मामले में ‘आप’ के शीर्ष नेताओं को लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी है:

  • मनीष सिसोदिया: सीबीआई ने उन्हें 26 फरवरी 2023 को गिरफ्तार किया था। वह लगभग 17 महीने (530 दिन) जेल में रहे। उन्हें 9 अगस्त 2024 को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली।
  • अरविंद केजरीवाल: उन्हें ईडी ने 21 मार्च 2024 को गिरफ्तार किया था। बाद में सीबीआई ने भी उन्हें हिरासत में लिया। वह लगभग 6 महीने जेल में रहे और 13 सितंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट से जमानत पर बाहर आए।

अरविंद केजरीवाल का मुख्यमंत्री बनने का सफर भारतीय राजनीति में एक बड़े बदलाव का प्रतीक रहा है:

  • पहली बार मुख्यमंत्री: अरविंद केजरीवाल 28 दिसंबर 2013 को पहली बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बने।
  • किसे हराया: 2013 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने नई दिल्ली सीट से लगातार तीन बार की मुख्यमंत्री और कांग्रेस की दिग्गज नेता शीला दीक्षित को 22,000 से अधिक वोटों से हराकर सबको चौंका दिया था।
  • हालांकि, जनलोकपाल बिल पास न होने के कारण उन्होंने महज 49 दिनों में इस्तीफा दे दिया था, लेकिन बाद में 2015 और 2020 में प्रचंड बहुमत के साथ दोबारा सत्ता में लौटे।

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