विश्वविद्यालय क्षेत्र स्थित राजकीय अनुसूचित जनजाति कल्याण छात्रावास संख्या-03 में बुधवार को प्रथम स्वतंत्रता सेनानी अमर शहीद तिलकामांझी की जयंती धूमधाम से मनाई गई। छात्रावास अधीक्षक डॉ. दीपक कुमार दिनकर की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षाविदों और गणमान्य अतिथियों ने तिलकामांझी के बलिदान को याद किया।
क्रांति के पहले बिगुल फूंकने वाले थे तिलकामांझी
मुख्य वक्ता टीएनबी कॉलेज के इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. रवि शंकर कुमार चौधरी ने ऐतिहासिक तथ्यों को रखते हुए कहा कि तिलकामांझी ने 1857 की क्रांति से भी 65 वर्ष पूर्व (1770-1785) ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंका था। उन्होंने बताया कि किस तरह तिलकामांझी ने भागलपुर के तत्कालीन कलेक्टर ऑगस्टस क्लीवलैंड को अपने तीर का निशाना बनाया था। ललिता प्रसाद विद्यार्थी और महाश्वेता देवी जैसे लेखकों ने उनके संघर्ष को अपनी कृतियों में अमर किया है।
पाठ्यक्रम में जगह देने की मांग
छात्रावास अधीक्षक डॉ. दीपक कुमार दिनकर ने तिलकामांझी को त्याग और संघर्ष का पर्याय बताया। उन्होंने मांग की कि तिलकामांझी की वीर गाथा को शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में उचित स्थान मिलना चाहिए ताकि नई पीढ़ी उनके व्यक्तित्व और कृतित्व से प्रेरणा ले सके। विशिष्ट अतिथि व बिहार राज्य खाद्य आयोग के सदस्य महादेव मंडल ने भी उनके संघर्ष को जन-जन तक पहुँचाने पर जोर दिया।
छात्रों की मांग: हॉस्टल में लगे प्रतिमा
कार्यक्रम के दौरान छात्रावास के छात्रों ने एक स्वर में मांग उठाई कि हॉस्टल परिसर में अमर शहीद तिलकामांझी की प्रतिमा स्थापित की जाए। इसके लिए उन्होंने कल्याण विभाग के अधिकारियों से जल्द कार्रवाई करने का आग्रह किया है। इस अवसर पर नीतीश कुमार, गौतम कुमार, बाबू लाल मरांडी, सौरभ कुमार और श्रवण कुमार सहित छात्रावास के सभी छात्र उपस्थित थे।

