बिहार पुलिस के मुखिया यानी डीजीपी (DGP) विनय कुमार ने महकमे में अनुशासन और वर्दी की गरिमा बनाए रखने के लिए एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। पिछले कुछ समय से पुलिसकर्मियों द्वारा ड्यूटी के दौरान और वर्दी पहनकर सोशल मीडिया पर रील्स बनाने के बढ़ते चलन को देखते हुए डीजीपी ने सख्त चेतावनी जारी की है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि जो भी पुलिसकर्मी या सिपाही वर्दी का प्रदर्शन करते हुए वीडियो या रील्स बनाएगा, उसे तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया जाएगा।
अनुशासनहीनता पर ‘जीरो टॉलरेंस’
डीजीपी विनय कुमार का मानना है कि पुलिस एक अनुशासित बल है और वर्दी पहनकर किसी भी प्रकार का मनोरंजन या गैर-पेशेवर आचरण जनता के बीच पुलिस की छवि को धूमिल करता है। अक्सर देखा जा रहा था कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी फिल्मी गानों पर वीडियो बनाकर इंस्टाग्राम या फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर साझा कर रहे थे। डीजीपी ने इस पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए इसे ‘घोर अनुशासनहीनता’ करार दिया है।
ड्यूटी के दौरान सोशल मीडिया पर पाबंदी
नए निर्देशों के अनुसार, ड्यूटी के समय पुलिसकर्मी सोशल मीडिया का उपयोग केवल आधिकारिक सूचनाओं या पेशेवर कार्यों के लिए ही कर सकते हैं। वर्दी पहनकर डांस करना, फिल्मी डायलॉग बोलना या आपत्तिजनक वीडियो बनाना अब भारी पड़ सकता है। डीजीपी ने सभी जिलों के एसपी और वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों पर नजर रखें और उल्लंघन करने वालों पर तुरंत विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करें।
वर्दी की गरिमा सर्वोपरि
पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी संदेश में कहा गया है कि पुलिसकर्मी समाज का रक्षक होता है और उसकी वर्दी शक्ति व जिम्मेदारी का प्रतीक है। जब पुलिसकर्मी रील्स बनाने में व्यस्त होते हैं, तो न केवल उनकी एकाग्रता भंग होती है, बल्कि आपातकालीन स्थितियों में उनकी प्रतिक्रिया की गति भी प्रभावित हो सकती है। यह आदेश उन सभी जवानों और अधिकारियों के लिए है जो सोशल मीडिया पर सक्रियता को अपनी ड्यूटी से ऊपर रखते हैं।
कार्रवाई के लिए तैयार रहें
डीजीपी ने साफ चेतावनी दी है कि यह आदेश केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा। यदि कोई पुलिसकर्मी वर्दी में रील्स बनाते हुए पाया जाता है, तो उसे सीधे निलंबन (Suspension) का सामना करना होगा। इसके साथ ही, संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच भी बैठाई जा सकती है।

