पटना। न्यूजस्टिच
बिहार विधान परिषद में महिला शिक्षकों के तबादले और डिग्री-इंटर कॉलेज शिक्षकों के वेतनमान का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। पूर्व मुख्यमंत्री और विधान परिषद सदस्य राबड़ी देवी ने महिला शिक्षकों की समस्याओं को उठाते हुए सरकार से मांग की कि सभी महिला शिक्षकों का ट्रांसफर उनके गृह जिला में किया जाए। उन्होंने कहा कि दूर-दराज जिलों में पोस्टिंग होने से महिला शिक्षकों को पारिवारिक और सामाजिक स्तर पर भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
महिलाओं को मिले गृह जिला, राबड़ी देवी की भावुक अपील
सदन में चर्चा के दौरान राबड़ी देवी ने महिला शिक्षकों के स्थानांतरण (Transfer) का मुद्दा बेहद संजीदगी से उठाया। उन्होंने सरकार से मांग की कि सभी महिला शिक्षकों का ट्रांसफर उनके गृह जिला में किया जाए। राबड़ी देवी ने कहा कि महिला शिक्षकों को अपने घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर दूसरे जिलों में काम करने में भारी कठिनाई हो रही है। इससे उनके पारिवारिक और सामाजिक जीवन पर बुरा असर पड़ रहा है। राबड़ी देवी की इस मानवीय मांग पर शिक्षा मंत्री ने सदन को भरोसा दिलाया कि सरकार महिला शिक्षकों के तबादले के मुद्दे पर सकारात्मक है और उन्हें गृह जिला भेजने की प्रक्रिया पर गंभीरता से काम किया जा रहा है।
वेतनमान पर तकरार, कमेटी की सुस्ती और अधिकारियों की मनमानी
इसी दौरान डिग्री और इंटर कॉलेज के शिक्षकों के लंबित वेतनमान का मुद्दा भी गरमाया रहा। बीजेपी एमएलसी नवल किशोर यादव ने सरकार को घेरते हुए कहा कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी कमेटी आखिर कब तक फैसला लेगी? उन्होंने साफ शब्दों में पूछा कि शिक्षकों को उनका बकाया वेतन कब तक मिलेगा। जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार ने भी इस सुर में सुर मिलाते हुए सिस्टम की खामियों को उजागर किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विश्वविद्यालयों को समय पर पैसा भेजती है, लेकिन वहां से कॉलेजों तक फंड नहीं पहुंच रहा। कई कॉलेज प्रशासन जानबूझकर शिक्षकों का वेतन जारी नहीं कर रहे हैं। कुछ अधिकारियों ने तानाशाही दिखाते हुए शिक्षकों के खाते तक ‘फ्रीज’ कर दिए हैं। सदन में मौजूद सदस्यों ने एक स्वर में मांग की कि ऐसे अधिकारियों को चिन्हित कर उन पर सख्त कार्रवाई की जाए जो सरकार की धनराशि को शिक्षकों तक पहुंचने से रोक रहे हैं।

