10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा अब सिर पर है। परीक्षा को शांतिपूर्ण और कदाचारमुक्त कराने के लिए पटना हाई कोर्ट ने करीब पाँच साल पहले बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) को केंद्राधीक्षकों (CS) की नियुक्ति को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए थे। इन निर्देशों के अनुसार ही शिक्षा विभाग को परीक्षा संचालन एवं मूल्यांकन कार्य के लिए केंद्राधीक्षकों की नियुक्ति करनी थी। लेकिन पूर्णिया जिले में शिक्षा विभाग पर हाई कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी कर CS की नियुक्ति करने का गंभीर आरोप लगा है। इस बार बनाए गए केंद्राधीक्षकों में से 38 नियुक्तियाँ ऐसी हैं जो हाई कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन कर की गई हैं, जबकि केवल 26 नियुक्तियां ही मानकों के अनुरूप बताई जा रही हैं। गौरतलब है कि जिले में वर्तमान में 150 से अधिक प्रधानाध्यापक उपलब्ध हैं, इसके बावजूद नियमों को दरकिनार कर नियुक्तियां की गई हैं।
क्या है पूरा मामला
केंद्राधीक्षक नियुक्ति में वरिष्ठता की अनदेखी को लेकर लखीसराय के महिला विद्या मंदिर के शिक्षक अरविंद कुमार भारती ने पटना हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। यह मामला C.W.J.C. संख्या 3997/2020 के रूप में दर्ज हुआ। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता संजय कुमार ने अदालत को बताया कि राज्य की वरीयता सूची में याचिकाकर्ता चौथे स्थान पर थे, इसके बावजूद उन्हें नजरअंदाज कर एक कनिष्ठ (Junior) शिक्षक को केंद्राधीक्षक बना दिया गया। चूंकि संबंधित परीक्षा समाप्त हो चुकी थी, इसलिए याचिकाकर्ता ने भविष्य की परीक्षाओं के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की।
हाई कोर्ट का सख्त निर्देश
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अनिल कुमार उपाध्याय की एकल पीठ ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए। भविष्य में केंद्राधीक्षक की नियुक्ति में वरिष्ठता (Seniority) का सख्ती से पालन किया जाएगा। यदि वरिष्ठता की अनदेखी की गई तो इसे न्यायालय की घोर अवमानना (Gross Contempt) माना जाएगा। कोर्ट के निर्देश के बाद BSEB ने जिलाधिकारियों को यह स्पष्ट किया कि प्रधानाध्यापक/प्राचार्य उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में ही प्रभारी प्रधानाध्यापक या प्रभारी प्राचार्य को CS बनाया जा सकता है।
चयन प्रक्रिया कैसी है
केंद्राधीक्षक चयन के लिए गठित समिति के अध्यक्ष जिलाधिकारी होते हैं। समिति में सदस्य के रूप में पुलिस अधीक्षक (SP), अनुमंडल पदाधिकारी (SDM), माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष, जिला शिक्षा पदाधिकारी (सदस्य सचिव सह संयोजक) यह समिति वरीयता सूची एवं निर्धारित मानकों के आधार पर CS का चयन करती है।
प्रधानाध्यापकों के कैडर की स्थिति
वर्तमान में जिले में प्रधानाध्यापक के दो कैडर हैं। पुराने वेतनमान वाले प्रधानाध्यापक, BPSC द्वारा चयनित नए प्रधानाध्यापक (संख्या लगभग 150)।
पहले क्या होता था
पूर्व के वर्षों में जब केवल पुराने वेतनमान वाले प्रधानाध्यापक कार्यरत थे, तब वरिष्ठता के आधार पर ही केंद्राधीक्षक या मूल्यांकन निदेशक बनाए जाते थे। यदि कभी कनिष्ठ को CS बनाना पड़ता था, तो उससे पहले वरीय प्रधानाध्यापक से अनापत्ति (NOC) ली जाती थी।
इस वर्ष क्या हो रहा है
इस वर्ष पर्याप्त संख्या में प्रधानाध्यापक उपलब्ध होने के बावजूद नियमों की अनदेखी की गई। प्रधानाध्यापकों की जगह उच्च विद्यालयों के प्रभारी प्रधानाध्यापक, वरिष्ठ शिक्षक, मध्य विद्यालयों के नियमित प्रधानाध्यापक को मिलाकर केंद्राधीक्षक बनाया गया है।
आंकड़े बताते हैं
उच्च माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक/प्राचार्य : 26
प्रभारी प्रधानाध्यापक/शिक्षक : 24
मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक : 14
जबकि मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापकों को CS बनाए जाने का कोई स्पष्ट विभागीय निर्देश उपलब्ध नहीं है।
जिले में परीक्षा केंद्रों की स्थिति
परीक्षा केंद्रों की संख्या : 64
केंद्राधीक्षकों की संख्या : 64
उपलब्ध प्रधानाध्यापक : करीब 150
जिलाधिकारी की मंजूरी के बाद हुई नियुक्ति
केंद्राधीक्षकों की नियुक्ति जिलाधिकारी के अनुमोदन के बाद की गई है। परीक्षा नजदीक होने के कारण अब इसमें बदलाव संभव नहीं दिख रहा। इस संबंध में क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक कुंदन कुमार ने कहा कि इस विषय पर बेहतर जानकारी जिला शिक्षा पदाधिकारी ही दे पाएंगे।

