‘इश्क’ जब जुनून बन जाए तो इंसान रिश्तों का कत्ल करने से भी नहीं हिचकता। छपरा के अमनौर में एक ऐसी ही दिल दहला देने वाली वारदात का अंत इंसाफ के साथ हुआ है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश पुनीत कुमार गर्ग की अदालत ने अपने ही पिता की हत्या की साजिश रचने वाली बेटी अनीता कुमारी और उसके प्रेमी रामबाबू कुमार को आजीवन कारावास (Life Imprisonment) की सजा सुनाई है। अदालत ने इस मामले को ‘घिनौना कृत्य’ करार देते हुए समाज पर इसके नकारात्मक प्रभाव का जिक्र किया और दोषियों पर भारी अर्थदंड भी लगाया है।
मात्र 8 महीने में मिला न्याय: स्पीडी ट्रायल का कमाल
बिहार की न्याय व्यवस्था में इस केस को एक नजीर के रूप में देखा जा रहा है। जिला जज ने स्पीडी ट्रायल चलाकर महज 8 महीने के भीतर केस का निपटारा कर सजा सुना दी। 1 सितंबर 2025 को आरोप तय हुए थे और फरवरी 2026 में फैसला आ गया।
क्या थी वो खूनी रात?
घटना 7 जून 2025 की है। अमनौर थाना के खास पट्टी गांव में मृतक के बेटे विकास कुमार ने अपनी आंखों से वो मंजर देखा था जिसने पूरे इलाके को सुन्न कर दिया था। रंगे हाथ पकड़े गए थे प्रेमी: अनीता और रामबाबू को उसके पिता ने आपत्तिजनक हालत में देख लिया था। बेटी ने पकड़े हाथ, प्रेमी ने चलाए चाकू: पकड़े जाने के डर और लोक-लाज के बजाय बेटी ने चिल्लाकर अपने प्रेमी से कहा-इनको जिंदा मत छोड़ो। बेटी ने पिता के हाथ पकड़े और प्रेमी रामबाबू ने चाकू से ताबड़तोड़ वार कर उनकी हत्या कर दी। बीच-बचाव करने आए भाई और मां पर भी हमला किया गया था।
सजा का विवरण
न्यायालय ने दोनों आरोपियों को निम्नलिखित धाराओं में सजा सुनाई है। इसमें BNS धारा 103 (1): आजीवन कारावास और 25-25 हजार रुपये जुर्माना (जुर्माना न भरने पर 1 साल अतिरिक्त जेल)। BNS धारा 109 (1): 6 वर्ष की कठोर कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माना। अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपियों के लिए फांसी की मांग की थी, वहीं बचाव पक्ष की ओर से डालसा के न्याय रक्षक पूर्णेन्दु रंजन ने दलीलें पेश कीं।
