डिग्री नहीं, ये तो ‘सुपर डॉक्टर’ हैं! डॉ. तारकेश्वर ने मुंबई में रचा इतिहास, बिहार के नाम कीं 3 बड़ी उपलब्धियां

आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के मसीहा और ‘सौ रुपये वाले डॉक्टर’ के नाम से प्रसिद्ध बिहार के डॉ. तारकेश्वर कुमार ने चिकित्सा जगत में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। मुंबई के पवई स्थित ‘द वेस्टिन मुंबई पवई लेक’ में आयोजित IAGES-ELSA 2026 सम्मेलन के दौरान डॉ. कुमार को एक साथ तीन प्रतिष्ठित फेलोशिप से सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि न केवल पूर्णिया बल्कि पूरे बिहार के चिकित्सा क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है।

इंडियन एसोसिएशन ऑफ गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल एंडो सर्जन्स (IAGES) और यूरोपियन एसोसिएशन फॉर एंडोस्कोपिक सर्जरी (ELSA) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन में डॉ. कुमार की विशेषज्ञता को तीन अलग-अलग श्रेणियों में सराहा गया है। EFIAGES (एंडोस्कोपी): फ्लेक्सिबल एंडोस्कोपी में उन्नत प्रशिक्षण के लिए। FALS हर्निया (एडवांस लैप्रोस्कोपी): हर्निया सर्जरी की आधुनिक तकनीकों में विशेषज्ञता। FALS कोलोरेक्टल (एडवांस लैप्रोस्कोपी): बड़ी आंत और मलाशय से संबंधित जटिल सर्जरी में निपुणता। IAGES के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा प्रदान किया गया यह सम्मान डॉ. कुमार की न्यूनतम इनवेसिव (Minimal Invasive) और आधुनिक एंडोस्कोपिक सर्जरी के प्रति उनकी मेहनत और समर्पण का प्रमाण है।

डॉ. तारकेश्वर कुमार वर्तमान में राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (GMCH) पूर्णिया में सर्जरी विभाग के सीनियर रेजिडेंट सह विभागाध्यक्ष के पद पर कार्यरत डॉ. तारकेश्वर कुमार की पहचान केवल एक कुशल सर्जन की ही नहीं, बल्कि एक संवेदनशील समाजशास्त्री की भी है। पटना मेडिकल कॉलेज (PMCH) से एमबीबीएस और एमएस (सर्जरी) करने वाले डॉ. कुमार एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं, जिस कारण वे स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी चुनौतियों को बखूबी समझते हैं। उन्होंने कहा कि मेरा लक्ष्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि तकनीक का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। मैं आगे भी मरीजों को सुरक्षित और आधुनिक सर्जिकल सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्ध रहूंगा।

डॉ. कुमार पूरे बिहार में “100 रुपये वाले डॉक्टर” के रूप में विख्यात हैं। उन्होंने अपने क्लिनिक (रेनू सर्जीकेयर) के माध्यम से एक मानवीय पहल शुरू की है, जिसके तहत वे मरीजों को मात्र 100 रुपये के पंजीकरण शुल्क पर आजीवन परामर्श प्रदान करते हैं। उनकी इस “आजीवन परामर्श योजना” ने यह सुनिश्चित किया है कि आर्थिक तंगी किसी भी व्यक्ति के इलाज में बाधा न बने। उनकी इसी सेवा भावना के लिए उन्हें पूर्व में ‘मिर्ची लाइफलाइन डॉक्टर्स अवार्ड’ से भी नवाजा जा चुका है।

एक सरकारी अस्पताल में कार्यरत रहते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानकों को छूना और तीन-तीन फेलोशिप एक साथ हासिल करना चिकित्सा जगत में दुर्लभ माना जाता है। डॉ. कुमार की यह सफलता दर्शाती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि संकल्प दृढ़ हो, तो वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है। उनकी इस उपलब्धि से सीमांचल और पूर्णिया प्रमंडल के युवा डॉक्टरों में एक नया उत्साह देखा जा रहा है।

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