कहते हैं कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती, और इस बात को सच कर दिखाया है गया की नन्हीं जीनियस सतीक्षा आदर्शी ने। महज 22 महीने की उम्र में, जहां बच्चे ठीक से बोलना सीख रहे होते हैं, सतीक्षा ने अपनी असाधारण स्मरण शक्ति (Memory Power) के दम पर विश्व रिकॉर्ड कायम कर बिहार और देश का नाम रोशन किया है।
50 मिनट में 330 वस्तुओं की पहचान
गया के पंत नगर मोहल्ले की रहने वाली सतीक्षा ने 13 अक्टूबर 2025 को एक ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया। उसने मात्र 50 मिनट के भीतर 330 अलग-अलग वस्तुओं की सटीक पहचान की। उसकी इस अद्भुत क्षमता को देखते हुए उसका नाम ‘Worldwide Book of Records’ में दर्ज किया गया है। सतीक्षा को इस उपलब्धि के लिए गोल्ड मेडल और सर्टिफिकेट से नवाजा गया है।
रिकॉर्ड्स की झड़ी: 53 देशों के झंडे और अजूबे जुबानी याद
सतीक्षा की प्रतिभा यहीं नहीं रुकी। उसने ‘Kalam World Records’ में भी अपनी जगह बनाई है। यहाँ उसने 500 कार्ड्स में से 410 आइटम्स को पहचान कर सबको दंग कर दिया। सतीक्षा की जानकारी का दायरा बेहद विस्तृत है:
- 53 देशों के झंडे और 26 विश्व के अजूबे।
- 27 स्वतंत्रता सेनानी और 19 अलग-अलग पेशे।
- पक्षी, जानवर, उनके बच्चे, फल, सब्जियां और ट्रांसपोर्ट के साधन।
- अक्षर (Alphabets), रंग, आकार और प्रमुख आविष्कार।
18 महीने की उम्र से ही दिखने लगी थी प्रतिभा
2 मार्च 2024 को जन्मी सतीक्षा के माता-पिता बताते हैं कि जब वह मात्र 18 महीने की थी, तभी से उसकी चीजों को पकड़ने और याद रखने की क्षमता सामान्य बच्चों से बहुत तेज थी। परिवार के सकारात्मक माहौल और निरंतर अभ्यास ने उसकी इस कुशाग्र बुद्धि को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने में मदद की।
गया के लिए गर्व का क्षण
सतीक्षा की इस सफलता ने गया को एक नई पहचान दी है। स्थानीय लोग उसे ‘नन्हीं कंप्यूटर’ और ‘गूगल गर्ल’ जैसे नामों से पुकार रहे हैं। सतीक्षा की कहानी आज उन सभी अभिभावकों के लिए प्रेरणा है जो अपने बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा और उनके कौशल विकास पर ध्यान देना चाहते हैं।

