बिहार की राजनीति में एक बड़ा कानूनी मोड़ आ गया है। चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर की ‘जन सुराज’ पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की वैधता को देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) में चुनौती दी है। पार्टी ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर कर पूरे चुनाव को रद्द करने और नए सिरे से मतदान कराने की मांग की है।
कल CJI की बेंच करेगी सुनवाई
इस हाई-प्रोफाइल मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट तुरंत सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। CJI सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच कल यानी शुक्रवार को इस याचिका पर सुनवाई करेगी। कानूनी विशेषज्ञों की नजर इस सुनवाई पर टिकी है, क्योंकि यह सीधे तौर पर चुनाव आयोग और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है।
MCC उल्लंघन और ‘कैश फॉर वोट’ का गंभीर आरोप
जन सुराज पार्टी का मुख्य आरोप आदर्श आचार संहिता (MCC) के उल्लंघन से जुड़ा है। याचिका में दावा किया गया है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ के तहत नए लाभार्थियों को जोड़ा गया और उनके बैंक खातों में अवैध रूप से राशि ट्रांसफर की गई।
याचिका के मुख्य बिंदु:
- 10,000 रुपये का ट्रांसफर: आरोप है कि चुनाव के दौरान लगभग 25 से 35 लाख महिला मतदाताओं को 10,000-10,000 रुपये दिए गए।
- वोटरों को प्रभावित करने की कोशिश: जन सुराज ने इसे मतदाताओं को सीधे तौर पर लुभाने की कोशिश और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताया है।
- नया लाभार्थी चयन: आचार संहिता लागू होने के बाद नए लाभार्थियों का चयन और भुगतान सवालों के घेरे में है।
बिहार की राजनीति में मचेगा हड़कंप
अगर सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर कोई कड़ा रुख अपनाता है, तो बिहार की नवनिर्वाचित सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। जन सुराज का तर्क है कि इस वित्तीय लाभ ने चुनाव के नतीजों को बड़े पैमाने पर प्रभावित किया है, जिससे यह चुनाव निष्पक्ष नहीं रह गया।
अब सबकी नजरें कल होने वाली सुनवाई पर हैं कि क्या अदालत चुनाव आयोग से जवाब तलब करेगी या इस याचिका पर अंतरिम रोक लगाएगी।

