पूर्णिया जीएमसीएच की तस्वीर।

पूर्णिया मेडिकल कॉलेज में ‘मुन्नाभाई’ कांड! फर्जी दिव्यांगता सर्टिफिकेट पर 7 छात्रों ने लिया MBBS में दाखिला, अब हुए फरार

साल 2003 के आखिरी महीने में आई संजय दत्त की फिल्म मुन्ना भाई एमबीबीएस तो आपको याद होगा ही। इस फिल्म में मुन्ना भाई ने किस प्रकार फर्जी तरीके से मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया वह सीन भी आपके स्मृति में होगा ही। कुछ ऐसा ही मामला पूर्णिया मेडिकल कॉलेज में भी सामने आया है। अंतर बस इतना है कि यहां एक नहीं बल्कि 7 मुन्ना भाई ने फर्जी तरीके से दाखिला लिया और पढ़ाई करने लगे। दरअसल, पूर्णिया के जीएमसीएच में सत्र 2023-24 में 7 छात्रों ने फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर एडमिशन लिया। जिन्हें कॉलेज प्रबंधन छात्रावास तक आवंटित कर दिया। इधर, जब इन फर्जी छात्रों का भेद खुला तो वे सभी कॉलेज से रातों-रात फरार हो गए।

जीएमसीएच में एमबीबीएस के दिव्यांग कोटा में फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर सातों फर्जी छात्रों ने दाखिला लिया था। मामले का खुलासा होते ही जीएमसीएच के प्रबंधक ने सातों छात्रों का एडमिशन रद्द कर उन्हें कॉलेज से निष्कासित कर दिया है। कॉलेज प्रबंधक ने इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को भी दे दी है। फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर नामांकन कराने वालों में दरभंगा के 3, अररिया के 1, सितामढ़ी के 1, बेतिया के 1 और नालंदा जिले के 1 छात्र शामिल है।

जीएमसीएच में एमबीबीएस की पढ़ाई के शुरुआत 2023 से ही प्रारंभ हो गई है। जीएमसीएच में 100 सिटों पर एमबीबीएस सिट आवंटन किया गया है। जिसमें 5 सिट दिव्यांग छात्रों के लिए है। जिस वक्त एडमिशन हुअा उस वक्त कॉलेज प्रबंधन ने दिव्यांगता प्रमाण पत्र की कोई जांच किए बिना ही नामांकन कर दिया। जब 2025 के दिसंबर में पहले बैच में एडमिशन के दौरान एक छात्र को फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र धराया उसके बाद कॉलेज प्रबंधक की आंखे खुल गई। लेकिन तब तक तीसरे बैच का पढ़ाई शुरू हो गया था। जब दिव्यांग कोटा से नामांकित सभी छात्रों के दिव्यांगता प्रमाण पत्र की जांच पड़ताल शुरू हुई तो वर्ष 2023 में 3 और वर्ष 2024 में 4 छात्रों का दिव्यांगता प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया। 2023 में जिन छात्रों का फर्जी प्रमाण पत्र पाए गए है उनमें मो. शहाबुद्दीन, फरहत शमीम एवं अजीत कुमार शामिल है। वहीं 2024 में फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर मुद्दसिर गयाज, मोहसिन फहीम, मो. अतील अजहर एवं मो. रसीद शामिल है। यह सभी छात्र सेकेंड एवं थर्ड ईयर में पढ़ाई भी कर रहे थे। मामले की खुलासा होने के बाद सभी छात्र फरार बताय जा रहा है।

जानकारी के अनुसर पकड़ गए और निष्कासित हुए सभी छात्रों ने फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र अपने-अपने गृह जिले से ही बनवाया था। इन सभी सात छात्रों ने कानों का दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाया थी। कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. डॉ. हरिशंकर मिश्र को जब इनके दिव्यांगता प्रमाण पत्र पर शक हुई तो उन्होंने इसकी जांच कराई। जांच में पता चला कि छात्रों ने कॉलेज में जो दिव्यांग प्रमाण पत्र जमा किया है वह प्रमाण पत्र दिव्यांगता प्रमाण पत्र देने वाली संस्था ने निर्गत नहीं किया है। उसके बाद प्रिंसिपल ने तथाकथित दिव्यांग छात्रों को हर तरह से कान की जांच कराई। इस जांच में साफ हो गया कि सातों छात्र साफ-साफ सुन सकते हैं। उन्हें किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं है। इस तरह से पूरे मामले का खुलासा हुआ।

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