NEET aspirant death case Patna

पटना NEET छात्रा मौत मामला! कोर्ट ने हॉस्टल मालिक मनीष रंजन की जमानत याचिका की खारिज, बेउर में ही रहेगा आरोपी

राजधानी पटना के चर्चित और बेहद संवेदनशील ‘नीट छात्रा संदिग्ध मौत मामले’ में मुख्य आरोपी हॉस्टल मालिक मनीष रंजन की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सोमवार को स्थानीय अदालत ने मनीष रंजन की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे राहत देने से साफ इनकार कर दिया और याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।

प्रथम श्रेणी की न्यायिक दंडाधिकारी प्रियंका कुमारी की अदालत में मनीष रंजन की ओर से दायर जमानत याचिका पर विस्तृत सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के वकीलों ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं। बचाव पक्ष ने मनीष रंजन को निर्दोष बताते हुए जमानत की गुहार लगाई, लेकिन अभियोजन पक्ष ने इसका कड़ा विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माननीय न्यायाधीश प्रियंका कुमारी ने मामले की संवेदनशीलता और जांच की स्थिति को देखते हुए सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि नीट छात्रा संवेदना की मौत का यह मामला अत्यंत गंभीर प्रकृति का है। साक्ष्यों और परिस्थितियों को देखते हुए फिलहाल आरोपी मनीष रंजन को जमानत नहीं दी जा सकती।

विगत दिनों पटना पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए मनीष रंजन को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। वर्तमान में मनीष रंजन पटना के केंद्रीय आदर्श कारा बेउर (बेउर जेल) में बंद है। कोर्ट के इस ताजा फैसले के बाद अब उसे फिलहाल जेल की सलाखों के पीछे ही रहना होगा।

संवेदना के माता-पिता ने अपनी बेटी की मौत के बाद हॉस्टल मालिक मनीष रंजन पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का दावा है कि हॉस्टल में सुरक्षा व्यवस्था की भारी चूक थी और उनकी बेटी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के पीछे मनीष रंजन की संदिग्ध भूमिका और प्रबंधन की लापरवाही है। इन्हीं आरोपों के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया था।

छात्रा संवेदना की मौत ने न केवल उसके परिवार को झकझोर दिया है, बल्कि पटना में कोचिंग और हॉस्टल में रहकर पढ़ने वाले हजारों छात्र-छात्राओं की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद अब संवेदना के परिजनों को न्याय की उम्मीद जगी है। फिलहाल पुलिस मामले के हर पहलू की गहराई से जांच कर रही है ताकि मौत के पीछे छिपे असली कारणों का खुलासा हो सके।

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