उत्तर बिहार और सीमावर्ती इलाकों के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित रेल कनेक्टिविटी का सपना अब साकार होने की दिशा में बढ़ गया है। ऊर्जा एवं वित्त मंत्री विजेंद्र
प्रसाद यादव के प्रयासों के परिणामस्वरूप ललितग्राम–वीरपुर नई रेल लाइन परियोजना को रेलवे बोर्ड से मंजूरी मिल गई है। यह 22 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन दशकों से क्षेत्र की प्रमुख मांग रही है।
परियोजना का अब तक का इतिहास
ललितग्राम–वीरपुर रेल लाइन की मांग आज की नहीं, बल्कि कई दशकों पुरानी है। कोसी क्षेत्र और नेपाल सीमा से सटे वीरपुर जैसे महत्वपूर्ण इलाके के बावजूद रेल संपर्क का अभाव लंबे समय तक रहा। इस कारण व्यापार और आवागमन प्रभावित रहा। वहीं रेल कनेक्टीविटी के अभाव में सीमावर्ती सुरक्षा और पर्यटन को अपेक्षित बढ़ावा नहीं मिल सका। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और आम जनता द्वारा समय-समय पर इस रेल लाइन की मांग उठाई जाती रही। हाल के वर्षों में इस मांग को ऊर्जा मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने गंभीरता से उठाया और इसे रेलवे बोर्ड तक प्रभावी ढंग से रखा।
रेल सेवा बहाल होने के बाद इस इलाके में अब क्या बदलेगा
रेलवे बोर्ड ने ललितग्राम–वीरपुर 22 किमी नई रेल लाइन को मंजूरी दे दी है। परियोजना के लिए DPR (Detailed Project Report) बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह मंजूरी मिलने के साथ ही परियोजना औपचारिक रूप से योजना से क्रियान्वयन के चरण में प्रवेश कर चुकी है।
सीतामढ़ी–जयनगर–निर्मली वाया सुरसंड नई रेल लाइन को भी मंजूरी
सीतामढ़ी-जयनगर-निर्मली वाया सुरसंड 188 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन को भी मंजूरी दी गई है। को भी मंजूरी प्रदान कर दी है। यह लाइन मिथिला और सीमांचल क्षेत्र को आपस में जोड़ने के साथ-साथ नेपाल सीमा तक संपर्क को और मजबूत करेगी। इस रेल लाइन के चालू हो जाने के बाद सीमावर्ती व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगी। इसके अलावा किसानों और कारोबारियों को बेहतर बाजार भी उपलब्ध होगा। वहीं रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे। रणनीतिक और सुरक्षा दृष्टि से भी यह रेल लाइन बहुत महत्वपूर्ण है। ऊर्जा मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि यह परियोजनाएं केवल रेल लाइन नहीं, बल्कि उत्तर बिहार के विकास की नई पटरी हैं। आने वाले समय में इनका लाभ सीधे आम जनता तक पहुंचेगा।

