सीतामढ़ी में 8600 में बिका मुर्गा।

500, 1000 नहीं…पूरे 8600 रुपये! सीतामढ़ी का ये मुर्गा बना स्टार, नमाज के बाद लगी बोली

बिहार का एक मुर्गा इन दिनों देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। चर्चा हो भी क्यों ना जब उसकी कीमत आठ हजार से भी अधिक हो। दरअसल, बिहार के सीतामढ़ी में एक मुर्गे की निलामी हुई है। निमाली में मुर्गे की बोली 8600 रुपए लगाई गई है। जिस वजह से मुर्गे की चर्चा पूरे देश में हो रही है। बता दें कि सीतामढ़ी जिले के सुरसंड स्थित आला हजरत जामे मस्जिद में जुमे की नमाज के बाद आयोजित डाक ने सभी को चौंका दिया। यहां एक साधारण सा दिखने वाला मुर्गा 8,600 रुपये में बिका। आमतौर पर खस्सी बकरी की कीमत से भी कहीं अधिक मानी जाती है।

मन्नत रखने के बाद मुर्गे की रखी निलामी

शेख अब्दुस सलाम ने किसी काम के पूरे होने के लिए मन्नत रखी थी। उन्होंने काम पूरा होने पर स्थानीय मजार पर मुर्गा चढ़ाने की मन्नत रखी थी। उनकी मन्नत पूरी हो गई और वह मजार पर चढ़ाने के लिए मुर्गा खोज रहे थे। बीते शुक्रवार को उन्हें जानकारी मिली कि आला हजरत जामे मस्जिद के पास एक मुर्गे की नीलामी होनी है। वह पहुंच गए और बोली लगाकर मुर्गे को खरीद दिया।

शुक्रवार को नमाज के बाद होती है नीलामी

हर शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद मस्जिद में कई प्रकार के वस्तओं की नीलामी होती है। यह परंपरा सालों से चली आ रही है। इस बार एक मुर्गे को भी बेचा जाना था और खरीदार कई थे। ऐसे में मस्जिद कमेटी ने नीलामी ने लिए बोली प्रक्रिया शुरू की कई ने 200 और कई ने 500 रुपए की बोली लगाई। लास्ट तक शेख अब्दुल कलाम और अब्दुल गफ्फार अंसारी नीलामी की बोली में टिके थे। अंतिम बोली शेख अब्दुल कलाम ने 8600 रुपए की लगाई और मुर्गा खरीद लिया।

क्यों होती है नमाज के बाद नीलामी

स्थानीय लोनों ने बताया कि हर शुक्रवार को नमाज के बाद मस्जिद में नीलामी की परंपरा है। नीलामी का मुख्य उद्देश्य मस्जिद से जुड़े कार्यों में सहयोग करना है। नीलामी से जो भी पैसा आता है। उसे मस्जिद में लगाया जाता है. साथ ही गरीब और बेसहारा लोगों की मदद भी की जाती है। वहीं लोगों ने यह भी बताया कि सहयोग के भवना से नीलामी होती है।

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