AIADMK के पूर्व सीएम DMK में शामिल

तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर! AI ADMK के पूर्व सीएम DMK में शामिल, जानिए कौन हैं पनीरसेल्वम

तमिलनाडु की सियासत से आज की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। AIADMK से निष्कासित नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम (OPS) ने औपचारिक रूप से DMK (द्रमुक) का दामन थाम लिया है। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन की मौजूदगी में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।

शुक्रवार सुबह से ही चेन्नई के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज थी कि OPS सत्ताधारी दल DMK में शामिल हो सकते हैं। पन्नीरसेल्वम के इस कदम को AIADMK प्रमुख एडप्पादी के. पलानीस्वामी (EPS) के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी से निकाले जाने के बाद से ही OPS और EPS के बीच वर्चस्व की कानूनी और राजनीतिक लड़ाई चल रही थी।

पार्टी मुख्यालय में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने पन्नीरसेल्वम को पार्टी का अंगवस्त्र पहनाकर स्वागत किया। इस दौरान तमिलनाडु सरकार के कई दिग्गज मंत्री और DMK के वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे।

ओ. पन्नीरसेल्वम, जिन्हें राजनीति में OPS के नाम से जाना जाता है, तमिलनाडु के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

  • जयललिता के ‘हनुमान’: उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता का सबसे भरोसेमंद सिपहसालार माना जाता था। जब भी जयललिता को कानूनी कारणों से मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा (2001 और 2014 में), उन्होंने पन्नीरसेल्वम को ही अपनी कुर्सी सौंपने के लिए चुना।
  • राजनीतिक सफर: उन्होंने अपने करियर की शुरुआत पेरियाकुलम नगरपालिका के अध्यक्ष के रूप में की थी और धीरे-धीरे एआईएडीएमके के सबसे कद्दावर नेताओं में शुमार हो गए।

2016 में जयललिता के निधन के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर एक लंबी जंग शुरू हुई, जो अंततः पन्नीरसेल्वम के निष्कासन पर खत्म हुई। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित थे:

  1. दोहरा नेतृत्व (Dual Leadership) बनाम एकल नेतृत्व: जयललिता के बाद पार्टी में दोहरा नेतृत्व मॉडल अपनाया गया, जिसमें पन्नीरसेल्वम ‘समन्वयक’ (Coordinator) और एडप्पादी के. पलानीस्वामी (EPS) ‘संयुक्त समन्वयक’ थे। हालांकि, 2022 में ईपीएस गुट ने एकल नेतृत्व (Single Leadership) की मांग तेज कर दी, जिसका ओपीएस ने विरोध किया।
  2. पार्टी के भीतर बगावत: जुलाई 2022 में एआईएडीएमके की जनरल काउंसिल की बैठक में ईपीएस को पार्टी का अंतरिम महासचिव चुन लिया गया। इसी बैठक के दौरान पन्नीरसेल्वम और उनके समर्थकों को “पार्टी विरोधी गतिविधियों” के आरोप में प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया गया।
  3. कानूनी लड़ाई: पन्नीरसेल्वम ने अपने निष्कासन और ईपीएस के महासचिव बनने को मद्रास हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन अदालती फैसलों ने अंततः ईपीएस के नियंत्रण को ही वैध माना।
  4. भाजपा और एनडीए का रुख: पिछले कुछ समय से ओपीएस एनडीए गठबंधन के साथ जुड़ने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन ईपीएस ने स्पष्ट कर दिया था कि यदि ओपीएस साथ रहते हैं, तो वह गठबंधन का हिस्सा नहीं रहेंगे। विकल्प सीमित होते देख ओपीएस ने अंततः अपने धुर विरोधी दल DMK में जाने का फैसला किया।
  • दिसंबर 2016: जयललिता के निधन के बाद ओपीएस तीसरी बार सीएम बने।
  • फरवरी 2017: शशिकला के खिलाफ ‘धर्म युद्ध’ शुरू किया, सीएम पद से इस्तीफा दिया।
  • अगस्त 2017: ईपीएस और ओपीएस गुटों का विलय; ओपीएस डिप्टी सीएम बने।
  • जुलाई 2022: ईपीएस गुट ने पूर्ण नियंत्रण लिया, ओपीएस पार्टी से बाहर किए गए।
  • फरवरी 2026: लंबी कानूनी लड़ाई और राजनीतिक अलगाव के बाद ओपीएस DMK में शामिल हुए।

पन्नीरसेल्वम का यह कदम एआईएडीएमके के ‘दो पत्ती’ प्रतीक और जयललिता की विरासत पर उनके दावे को कमजोर कर सकता है, लेकिन DMK के लिए यह दक्षिण तमिलनाडु में एक मजबूत आधार साबित हो सकता है।

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