लोकतंत्र को अक्सर ‘जनता का, जनता के लिए और जनता द्वारा’ शासन कहा जाता है, लेकिन इसकी सबसे खूबसूरत तस्वीर झारखंड के पलामू जिले में देखने को मिली है। यहाँ नगर निकाय चुनाव के नतीजों ने साबित कर दिया है कि सेवा करने के लिए शरीर की मजबूती से कहीं ज्यादा इरादों की मजबूती जरूरी है। जिले के छतरपुर नगर पंचायत के वार्ड नंबर 8 से दीपक कुमार ने जीत दर्ज कर एक नया इतिहास रच दिया है।
दोनों हाथ नहीं, फिर भी मिला जनता का ‘साथ’
दीपक कुमार की यह जीत इसलिए खास है क्योंकि वे शारीरिक रूप से दोनों हाथों से दिव्यांग हैं। सामान्य तौर पर लोग जिसे कमजोरी मान लेते हैं, दीपक ने उसे अपनी ताकत बनाया। उनके पास भले ही हाथ नहीं हैं, लेकिन उनके पास शिक्षित मस्तिष्क (बीए पास) और समाज के लिए कुछ कर गुजरने का विजन है। चुनाव प्रचार के दौरान जब वे गलियों में निकलते थे, तो उनकी सादगी और जज्बे ने मतदाताओं का दिल जीत लिया।
बीए पास दीपक का विजन: सेवा ही एकमात्र लक्ष्य
दीपक कुमार महज एक प्रत्याशी नहीं, बल्कि एक शिक्षित युवा भी हैं। बीए (B.A.) तक की शिक्षा प्राप्त करने वाले दीपक को राजनीति की समझ और वार्ड की समस्याओं का पूरा ज्ञान है। जीत के बाद उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “जनता ने मेरे शारीरिक अभाव को नहीं, बल्कि मेरे अटूट विश्वास और सेवा की भावना को देखा है। जिस तरह वार्ड की जनता ने मुझे अपना समर्थन और आशीर्वाद देकर जिताया है, मैं उसी समर्पण के साथ वार्ड के विकास के लिए दिन-रात एक कर दूँगा।”
लोकतंत्र की जीत और समाज को संदेश
पलामू की यह जीत उन सभी लोगों के लिए एक कड़ा जवाब है जो दिव्यांगता को समाज पर बोझ या एक बाधा मानते हैं। दीपक की जीत ने यह संदेश दिया है कि लोकतंत्र में मतदाता अब जागरूक हो चुका है; उसे ‘बाहुबल’ या ‘धनबल’ नहीं, बल्कि एक ‘कर्मठ’ सेवक चाहिए। छतरपुर नगर पंचायत के वार्ड 8 के निवासियों ने एक ऐसे व्यक्ति को अपना प्रतिनिधि चुना है, जो भले ही अपने हाथों से दस्तखत न कर सके (या अलग तरीके से करे), लेकिन वह अपनी मेहनत से वार्ड की तकदीर लिखने का माद्दा रखता है।
वार्ड के विकास की नई उम्मीद
वार्ड नंबर 8 के लोग अब उत्साहित हैं। उनका मानना है कि दीपक जैसे ईमानदार और जुझारू युवा के नेतृत्व में इलाके की साफ-सफाई, जल निकासी और शिक्षा जैसी बुनियादी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर होगा। दीपक की यह जीत न केवल पलामू बल्कि पूरे झारखंड के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

