पटना नीट (NEET) छात्रा के साथ कथित दुष्कर्म औ संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस ने 15 संदिग्धों की सूची तैयार की है। जिनका DNA सैंपल लिया जाएगा। इसके साथ ही पुलिस हिरासत मंे लिये गये हॉस्टलके मालिक मनीष रंजन का भी सैंपल लेगी और छात्रा के कपड़ों में मिले स्पर्म के DNA से मिलाएगी।
तीन संदिग्धों का DNA सैंपल लिया गया
कंकड़बाग थाना पुलिस ने हिरासत में लिए गए तीन मुख्य संदिग्धों का DNA सैंपल लिया है। जानकारी के अनुसार, इन तीन में से दो मृतक छात्रा के करीबी बताए जा रहे हैं, जबकि एक पटना का ही स्थानीय निवासी है। परिजनों का शुरू से ही आरोप है कि छात्रा के साथ हॉस्टल के भीतर ही (दुष्कर्म) किया गया और साक्ष्यों को मिटाने की कोशिश की गई।
सवालों के घेरे में पटना पुलिस और प्रभात हॉस्पिटल
इस पूरे मामले में पटना पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। शुरुआती जांच में थानेदार और प्रभात हॉस्पिटल की रिपोर्ट पर भरोसा करने के कारण पुलिस की भारी किरकिरी हुई है। परिजनों का आरोप है कि पुलिस और अस्पताल प्रबंधन किसी को बचाने की कोशिश कर रहे थे।
पुलिस की जांच पर उठ रहे 3 बड़े सवाल:
- साक्ष्यों की अनदेखी: परिजनों का दावा है कि उन्होंने 10 जनवरी को ही पुलिस को छात्रा के अंडरगार्मेंट्स और अन्य कपड़े सौंप दिए थे, लेकिन जांच में देरी क्यों हुई?
- संदिग्ध रिपोर्ट: शंभू हॉस्पिटल की जिस रिपोर्ट को आधार बनाकर पुलिस ने शुरुआत में मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की, उस पर अब संशय क्यों है?
- किसे बचा रही है पुलिस: शुरुआत से ही जांच का ढुलमुल रवैया यह संकेत देता है कि कहीं किसी रसूखदार को बचाने की कोशिश तो नहीं की जा रही?
परिजनों का ‘इंसाफ’ के लिए संघर्ष
मृतका के परिजनों का स्पष्ट कहना है कि हॉस्टल में छात्रा सुरक्षित नहीं थी। अब 15 संदिग्धों के DNA मिलान के बाद ही इस उलझी हुई गुत्थी के सुलझने की उम्मीद है। शहर के छात्र संगठन और स्थानीय लोग भी इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर आक्रोशित हैं।

