डेस्क । न्यूजस्टिच
बिहार सरकार ने पूर्णिया, पूर्वी चम्पारण और जमुई में डिजिटल तारामंडल स्थापित करने के लिए 39 करोड़ रुपये का बजट पास कर दिया है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की इस महत्वाकांक्षी परियोजना से स्थानीय युवाओं और छात्रों को आधुनिक खगोलीय शिक्षा का अवसर मिलेगा। केंद्र सरकार की संस्कृति एवं विज्ञान संवर्धन योजना (SPOCS) के तहत यह प्रोजेक्ट चलेगा, जिसमें केंद्र सरकार 16.80 करोड़ और बिहार सरकार 22.20 करोड़ रुपये का योगदान देगी।
पूर्णिया के मधुबनी मौजा के 3 एकड़ जमीन पर बनेगा तारामंडल
राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद (NCSM) निर्माण का जिम्मा संभालेगी। पूर्णिया में यह तारामंडल मधुबनी मौजा की 3 एकड़ से अधिक भूमि पर बनेगा। नए वित्तीय वर्ष 2026-27 से काम शुरू होने की संभावना है। इससे पूर्वी बिहार के युवाओं को अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया से रूबरू होने का मौका मिलेगा। स्थानीय लोगों में खुशी की लहर है, क्योंकि यह परियोजना शिक्षा और पर्यटन दोनों को बढ़ावा देगी।
डिजिटल तारामंडल क्या है?
डिजिटल तारामंडल एक गुंबदाकार थिएटर होता है, जहां हाई-टेक डिजिटल प्रोजेक्टरों से रात के आकाश, ग्रहों, तारों, आकाशगंगाओं और ब्रह्मांड की यात्रा का जीवंत अनुभव कराया जाता है। 2D-3D शो, वर्चुअल रियलिटी, लेजर शो और इंटरैक्टिव प्रदर्शनियां यहां मुख्य आकर्षण होंगी। छात्रों को ग्रहों की कक्षाओं, ब्लैक होल और उल्कापिंडों के रहस्य आसानी से समझ आएंगे। यह पारंपरिक ऑप्टिकल तारामंडल से कहीं अधिक उन्नत है, जो रियल-टाइम सिमुलेशन प्रदान करता है।
पटना और दरभंगा में पहले से चल रहा है तारामंडल
बिहार में पटना और दरभंगा में पहले से तारामंडल कार्यरत हैं, जो लोकप्रिय हैं। इन नई सुविधाओं से ऑनलाइन टिकट बुकिंग, विभिन्न स्लॉट और शैक्षिक वर्कशॉप उपलब्ध होंगे। विज्ञान मंत्री ने कहा कि यह युवाओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करेगा। पूर्णिया के 250 वर्ष पुराने वेधशाला को भी अपग्रेड किया जा रहा है, जो इस परियोजना को पूरक बनेगा।
यह प्रोजेक्ट बिहार के ग्रामीण इलाकों में विज्ञान शिक्षा को मजबूत करेगा। छात्रों के अलावा पर्यटक भी आकर्षित होंगे। कुल मिलाकर, पूर्णिया अब ब्रह्मांड के रहस्यों का केंद्र बनेगा।

