पूर्णिया (मीरगंज)। न्यूजस्टिच
बिहार के पूर्णिया से एक ऐसी रूह कँपा देने वाली खबर सामने आई है, जिसने न्याय प्रणाली और सामाजिक सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मीरगंज थाना क्षेत्र में एक महिला के साथ मक्के के खेत में सामूहिक बलात्कार जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम दिया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी कोई नया अपराधी नहीं, बल्कि जेल से चंद दिनों पहले छूटा वही ‘आदतन दरिंदा’ है, जिसने साल 2024 में भी एक महिला की जिंदगी बर्बाद की थी।
एकांत का फायदा उठाकर फिर की दरिंदगी
पीड़िता द्वारा पुलिस को दी गई जानकारी के अनुसार, वह दोपहर के वक्त घर से पश्चिम की ओर नदी पार कर अपने मक्के के खेत की देखरेख करने गई थी। खेत में उसे अकेला पाकर गाँव के ही मन्नू कुमार ने घात लगाकर उस पर हमला कर दिया। महिला ने अपनी अस्मत बचाने के लिए संघर्ष किया, शोर मचाया, लेकिन सुनसान इलाके और आरोपी की दरिंदगी के आगे उसकी एक न चली। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी वहाँ से फरार हो गया।
कानून का खौफ या गिरफ्तारी का डर? खाया जहर
पीड़िता ने जब घर पहुँचकर अपने पति को आपबीती सुनाई, तो आनन-फानन में मीरगंज थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। पुलिसिया दबिश बढ़ते ही आरोपी मन्नू कुमार ने लोक-लाज और फिर से जेल जाने के डर से जहर खाकर आत्महत्या की कोशिश की। वर्तमान में वह पुलिस कस्टडी में पूर्णिया जीएमसीएच (GMCH) में भर्ती है, जहाँ उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।
आदतन अपराधी: कानून की खामियों का फायदा
पुलिस रिकॉर्ड खंगालने पर जो सच सामने आया, वह दहला देने वाला है। आरोपी मन्नू कुमार साल 2024 में भी रेप के आरोप में जेल जा चुका था। हाल ही में वह जमानत पर बाहर आया था। जेल की सलाखें भी उसकी मानसिकता को नहीं बदल सकीं और बाहर आते ही उसने फिर से एक महिला को अपना शिकार बना लिया। इस घटना ने स्थानीय ग्रामीणों में भारी रोष पैदा कर दिया है। लोगों का कहना है कि ऐसे अपराधियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए ताकि वे समाज के लिए दोबारा खतरा न बनें।
पुलिसिया कार्रवाई: न्याय की उम्मीद
मीरगंज थाना की अपर थानाध्यक्ष सरिता कुमारी ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि पीड़िता के बयान पर केस दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने कहा, “आरोपी फिलहाल अस्पताल में है और पुलिस की कड़ी निगरानी में है। जैसे ही उसकी हालत में सुधार होगा और डॉक्टर उसे फिट घोषित करेंगे, उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा।” यह मामला इस बात की ओर इशारा करता है कि आदतन अपराधियों की जमानत के बाद उनकी निगरानी कितनी जरूरी है, ताकि किसी और महिला की ‘सूनी गोद’ या ‘उजड़ी अस्मत’ की खबरें न पढ़नी पड़ें।

