पूर्णिया विश्वविद्यालय में सरकार द्वारा समय पर राशि आवंटित किए जाने के बावजूद सेवानिवृत्त शिक्षकों को पेंशन का भुगतान नहीं होना प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है। विश्वविद्यालय के इतिहास में यह संभवतः पहली घटना है, जहां खजाने में पैसा होने के बाद भी बुजुर्ग शिक्षक अपने हक के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
प्रशासनिक अक्षमता और संवेदनहीनता का आरोप
सेवानिवृत्त शिक्षक संघ का कहना है कि विश्वविद्यालय में नए रजिस्ट्रार ने ‘बड़ा दिन’ (क्रिसमस) की छुट्टियों से पहले ही योगदान दे दिया है, लेकिन उनके आने के महीनों बाद भी पेंशन फाइलें आगे नहीं बढ़ी हैं। संघ के अध्यक्ष डॉ. दिलीप प्रसाद साह ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस उम्र में अधिकांश शिक्षक चिकित्सकीय परामर्श और दवाओं पर आश्रित हैं। पैसे के अभाव में कई शिक्षकों का इलाज बाधित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है, जबकि शिक्षक टकटकी लगाए पेंशन का इंतजार कर रहे हैं।
इतिहास में पहली बार ऐसी स्थिति
संघ के सचिव डॉ. चन्द्र कांत यादव और कोषाध्यक्ष डॉ. सिकन्दर प्रसाद यादव ने संयुक्त रूप से कहा कि यदि सरकार से राशि नहीं आती, तो देरी समझ में आती थी। परंतु बिहार के अन्य सभी विश्वविद्यालयों में भुगतान हो चुका है, केवल पूर्णिया विश्वविद्यालय में ही मामला अटका है। यह न केवल प्रशासनिक अदूरदर्शिता है, बल्कि सेवा निवृत्त कर्मियों के प्रति घोर संवेदनहीनता भी है।
प्रतिशोध और आश्वासनों का खेल
खबर यह भी है कि कुछ शिक्षकों को सेवानिवृत्त हुए एक वर्ष बीत चुका है, लेकिन उनके भुगतान की प्रक्रिया शुरू तक नहीं हुई है। सूत्रों के अनुसार, एक निलंबित प्रधानाचार्य का व्यक्तिगत आक्रोश शिक्षकों पर निकाला जा रहा है, जिससे फाइलें लंबित हैं। विदित हो कि कुछ माह पूर्व कुलपति महोदय ने संघ को आश्वासन देते हुए कहा था, “यह मेरा काम है, मुझ पर विश्वास रखें, शीघ्र समाधान होगा।” लेकिन महीनों बीत जाने और सिंडिकेट की बैठक में मामला उठने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
नियुक्ति पर सवाल और कटौती का खेल
एक चौंकाने वाला मामला यह भी सामने आया है कि जो शिक्षक दशकों तक विश्वविद्यालय के उच्च पदों पर कार्यरत रहे, सेवानिवृत्ति के बाद उनकी नियुक्ति को ‘अवैध’ बताकर पेंशन राशि में कटौती की जा रही है। संघ का सवाल है कि सेवाकाल के दौरान जब तमाम लाभ दिए जा रहे थे, तब कागजात सही थे, तो अब सेवानिवृत्ति के वक्त बहानेबाजी क्यों? पूर्णिया विश्वविद्यालय सेवानिवृत्त शिक्षक संघ ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही इन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ और पेंशन का भुगतान सुनिश्चित नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

