पूर्णिया शहर एक बार फिर गोलियों की आवाज से दहल उठा है। मंगलवार की सुबह नेवालाल चौक स्थित फन सिटी पार्क के समीप गुलाबबाग निवासी युवा व्यवसायी और इन्फ्लुएंसर सूरज बिहारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। हत्या की वजह सरस्वती पूजा के दिन इंस्टाग्राम रील को लेकर हुए विवाद को बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि इसी विवाद के समझौते को लेकर सूरज आया था। लेकिन दूसरे पक्ष की ओर से पहले बहस और फिर मारपीट हुई और बाद में सूरज की हत्या कर दी गई।

वसंतविहार के दो भाईयों पर हत्या का आरोप
सूरज की हत्या का आरोप वसंतविहार के दो भाईयों ब्रजेश सिंह और नंदू सिंह पर है। गौरतलब है कि नेवालाल चौक-वसंत बिहार अपराधियों की शरणस्थली बन चुका है और आए दिन यहां आपराधिक घटनाएं घटित होती रहती है। बता दें कि बीते 10 जनवरी को इसी नेवालाल चौक से एक युवती का अपहरण कर उसके साथ गैंग-रेप को अंजाम दिया गया था।
सरस्वती पूजा पर लड़की के साथ रील बनाने से शुरू हुआ विवाद
बताया जाता है कि नेवालाल चौक निवासी सुबोध शर्मा का पुत्र सूरज शर्मा डिजिटल क्रिएटर है और अपना पूर्णिया नाम से पेज चलाता है। सूरज शर्मा ने पूजा के मौके पर एक प्राइवेट स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में एक स्थानीय लड़की के साथ रील बनाया और उसे पेज पर पोस्ट कर दिया। यह बात उक्त लड़की के बॉयफ्रेंड नेवालाल चौक निवासी स्नेहिल को नागवार गुजरी। 26 जनवरी को सूरज शर्मा को पकड़कर स्नेहिल द्वारा पिटाई की गई और उसका वीडियो भी बनाया गया। इसके बाद विवाद बढ़ता चला गया।
सूरज शर्मा के पिता का स्नेहिल से हुआ झगड़ा
मंगलवार को मारपीट की घटना की शिकायत लेकर सूरज शर्मा के पिता सुबोध शर्मा स्नेहिल के घर पहुंचे। वहां स्नेहिल के साथ सुबोध का झगड़ा और मारपीट हुआ। इस घटना के कुछ देर बाद स्नेहिल हत्यारोपी ब्रजेश सिंह और नंदू सिंह के साथ पहुंचकर शर्मा परिवार के साथ मारपीट की।
सूरज शर्मा का दोस्त था मृतक का छोटा भाई उदय बिहारी
सूरज शर्मा के घर सूरज बिहारी का छोटा भाई उदय बिहारी भी आ गया। जो सूरज का दोस्त था। उनलोगों ने उदय बिहारी की भी पिटाई की। जिसके बाद उदय ने अपने भाई को सूरज बिहारी को फोन कर बुलाया था। भाई के फोन पर सूरज घटनाथल पर पहुंचा। वहां समझौता के लिए स्नेहिल को बुलाया गया। स्नेहिल के साथ ब्रजेश और नंदू सिंह समेत और 7-8 लोग पहुंचे थे। बातचीत के क्रम में विवाद होने लगा तो ब्रजेश और नंदू ने सूरज को गोली मार दी। सूरज के पास भी लाइसेंसी हथियार था लेकिन, गाड़ी में रहने की वजह से उसका प्रयोग आत्मरक्षा के लिए नहीं कर सका।

