भारत-नेपाल सीमा पर स्थित पूर्वी चंपारण का रक्सौल रेलवे स्टेशन आने वाले समय में पूरी तरह बदलने वाला है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने रक्सौल को ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत विश्वस्तरीय बनाने का निर्णय लिया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 54 करोड़ रुपये की लागत आएगी। वर्तमान में स्टेशन के कायाकल्प का काम युद्धस्तर पर चल रहा है और उम्मीद है कि अगले एक साल के भीतर रक्सौल रेलवे स्टेशन आधुनिक सुविधाओं से लैस होकर एक नए कलेवर में नजर आएगा।
पशुपतिनाथ मंदिर की तर्ज पर बनेगा स्टेशन भवन
रक्सौल रेलवे स्टेशन का पुनर्निर्माण न केवल आधुनिकता बल्कि सांस्कृतिक पहचान को भी ध्यान में रखकर किया जा रहा है। स्टेशन की मुख्य इमारत का डिजाइन नेपाल स्थित सुप्रसिद्ध बाबा पशुपतिनाथ मंदिर की तर्ज पर होगा। स्टेशन के भवन पर मंदिर जैसी कलाकृतियां उकेरी जाएंगी, जो यहाँ आने वाले पर्यटकों और यात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेंगी। चूँकि रक्सौल नेपाल का प्रवेश द्वार माना जाता है, इसलिए इस थीम का चयन भारत-नेपाल के सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूती प्रदान करेगा।
यात्रियों को मिलेंगी ये ‘वर्ल्ड क्लास’ सुविधाएं
54 करोड़ के इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत यात्रियों की सुविधा का खास ख्याल रखा गया है। वर्ल्ड क्लास स्टेशन बनने के बाद यहाँ निम्नलिखित सुविधाएं उपलब्ध होंगी। एस्केलेटर और लिफ्ट: प्लेटफॉर्म पर आवाजाही को सुलभ बनाने के लिए स्वचालित सीढ़ियां लगाई जाएंगी। यात्रियों के आराम के लिए वातानुकूलित और भव्य प्रतीक्षालय यानी अत्याधुनिक वेटिंग रूम बनाए जा रहे हैं। बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्लेटफॉर्म की लंबाई और चौड़ाई का विस्तार किया जा रहा है। आधुनिक शौचालय, कैफेटेरिया, वाई-फाई और हाई-टेक सुरक्षा उपकरणों से स्टेशन लैस होगा।
प्रधानमंत्री का ‘अमृत भारत’ विजन
केंद्र सरकार की कोशिश है कि देश के महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों को केवल आवाजाही का केंद्र न बनाकर उन्हें एक ‘सिटी सेंटर’ के रूप में विकसित किया जाए। इसी कड़ी में रक्सौल का चयन किया गया है। भारत-नेपाल सीमा पर होने के कारण सामरिक और व्यापारिक दृष्टिकोण से रक्सौल एक अत्यंत महत्वपूर्ण जंक्शन है। इस स्टेशन के आधुनिक हो जाने से न केवल स्थानीय लोगों को बल्कि नेपाल से आने-जाने वाले हजारों यात्रियों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की यात्रा का अनुभव मिलेगा।

