पटना मरीन ड्राइव के ‘फूड स्टॉल्स’ पर सियासत! रोहिणी आचार्य ने नीतीश सरकार को घेरा, पूछा-बेटियों-युवाओं का रोजगार क्यों छीना?

पटना के प्रसिद्ध जे.पी. गंगा पाथ-वे (मरीन ड्राइव) पर फूड स्टॉल के आवंटन में हो रही देरी अब एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन गया है। लालू प्रसाद यादव की पुत्री और राजद नेता रोहिणी आचार्य ने इस मामले को लेकर नीतीश सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट साझा कर सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग की है।

रोहिणी आचार्य ने अपनी पोस्ट में कहा कि मरीन ड्राइव पर फूड स्टॉल लगाने वाले सैकड़ों युवाओं, युवतियों और महिलाओं के सामने आज रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने बताया कि पूर्व में यहाँ बड़ी संख्या में स्टॉल संचालित हो रहे थे, जिससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित हो रहा था, बल्कि पटना की रौनक भी बढ़ रही थी। आवंटन प्रक्रिया में हो रहे विलंब के कारण ये लोग अब बेरोजगार बैठने को मजबूर हैं।

रोहिणी ने इस मुद्दे के मानवीय पक्ष को उजागर करते हुए लिखा कि इन स्टॉल संचालकों में बड़ी संख्या ऐसी विधवा और तलाकशुदा महिलाओं की थी, जो स्वरोजगार के माध्यम से अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही थीं। सरकार की सुस्ती ने इन महिलाओं को आर्थिक तंगी के दलदल में धकेल दिया है। उन्होंने जोर दिया कि ये स्टॉल केवल दुकानें नहीं, बल्कि कई घरों के चूल्हे जलने का एकमात्र जरिया हैं।

रोहिणी आचार्य ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नगर विकास मंत्री से अपील की है कि आवंटन की प्रक्रिया में पारदर्शिता बरतते हुए तुरंत निर्णय लिया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि चूंकि मरीन ड्राइव का इलाका काफी विस्तृत और बड़ा है, इसलिए सरकार को स्टॉल्स की वर्तमान संख्या बढ़ाने पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए। इससे और अधिक लोगों को रोजगार मिल सकेगा।

गौरतलब है कि पटना का मरीन ड्राइव पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र है। यहाँ फूड स्टॉल्स के व्यवस्थित आवंटन की योजना लंबे समय से अटकी हुई है। रोहिणी आचार्य के इस हस्तक्षेप के बाद अब विपक्षी खेमे ने भी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन इन छोटे दुकानदारों की व्यथा सुनेगा या आवंटन की फाइलें दफ्तरों के चक्कर काटती रहेंगी?

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