हरियाणा सरकार द्वारा आयोजित 41वें राज्य स्तरीय पशु मेले में रोहतक के ‘रामू’ भैंसे ने अपनी बादशाहत साबित की है। शुद्ध मुर्रा नस्ल के इस भैंसे ने ‘4 दांत’ प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त कर न केवल गोल्ड मेडल जीता, बल्कि अपनी विशिष्ट कद-काठी से विशेषज्ञों और जजों को भी प्रभावित किया।
रोजाना 5 लीटर दूध है ‘रामू’ की ताकत का राज
रोहतक के जसैया गांव के युवा पशुपालक सन्नी ने बताया कि रामू की शानदार बॉडी और चमकती त्वचा के पीछे एक विशेष डाइट चार्ट है। सन्नी के अनुसार, रामू को रोजाना पोषक तत्वों से भरपूर चारे के साथ 5 लीटर दूध पिलाया जाता है। तीन साल की उम्र में ही यह भैंसा कई प्रतियोगिताओं में अपना लोहा मनवा चुका है। इससे पहले भी कुरुक्षेत्र के डीएफए मेले में इसने स्वर्ण पदक हासिल किया था।
विशेषज्ञों की नजर में क्यों है खास?
मेले में मौजूद जजों के अनुसार, रामू की शारीरिक बनावट, सींगों की बनावट और मजबूत कद-काठी इसे एक आदर्श मुर्रा भैंसा बनाती है। पशुपालक सन्नी केवल चार मुर्रा भैंसे रखते हैं और उनका दावा है कि वे सभी ‘चैंपियन मटेरियल’ हैं। रामू को दिए जाने वाले ‘स्पेशल फीड कॉकटेल’ और देखभाल की चर्चा पूरे मेले में रही।
पशुपालकों के लिए प्रेरणा बना मेला
इस राज्य स्तरीय पशु मेले में 1500 से अधिक पशुपालक अपने बेहतरीन पशुओं के साथ पहुंचे थे। मेले का उद्देश्य उच्च नस्ल के पशुओं का प्रदर्शन और पशुपालकों को नई तकनीक व नस्ल सुधार के प्रति जागरूक करना है। सन्नी और उनके भैंसे ‘रामू’ की यह सफलता अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से हरियाणा की ‘मुर्रा’ नस्ल को वैश्विक पहचान मिलती है और पशुपालन क्षेत्र में युवाओं की रुचि बढ़ती है।
