समस्तीपुर में बैलगाड़ी पर सवार होकर जाते बाराती।

ऑडी-BMW धरी रह गईं! 22 बैलगाड़ियों पर सवार होकर आया ‘लग्जरी दूल्हा’! समस्तीपुर में दिखा महाराजाओं वाला स्वैग

आधुनिक दौर में शादियां पवित्र -संस्कार से अधिक इवेंट मैनजमेंट बन चुका है और अमूनन शाही शादियों की खूब चर्चा होती है। जहां खर्च की राशि करोड़ों में होती है। घोड़ियां चढ़ने की जगह अब दूल्हा-दुल्हन के लिए हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे में समस्तीपुर के एक सम्पन्न व्यापारी के घर हुई शादी अपने सादगी और अनोखे अंदाज की वजह से सुर्खियों में है। दरअसल इस शादी में न तो लक्जरी वाहन का इस्तेमाल हुआ और न ही डीजे का ही प्रयोग हुआ। 22 बैलगाड़ी पर सवार दूल्हा और बरात ने विवाह भवन तक का सफर तय किया। इस अनोखी बरात  को मोबाइल में कैद करने के लिए सड़क के किनारे में लोगों की कतार लगी रही। अब यह शादी और बरात सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ है।

शहर के चर्चित कारोबारी प्रदीप सेठ के पुत्र आलोक की शादी में बैलगाड़ी की बरात देखने को मिला। जाहिर है यह आधुनिकता पर परंपरा को तरजीह तो थी हीं, इस शादी के जरिये पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दिया गया।44 बैल से सजी 22 बैलगाड़ियों का यह काफिला दो किलोमीटर से अधिक का सफर तय कर मथुरापुर स्थित गजराज पैलेस पहुंचा, जहां बधू दूल्हे का इंतजार कर रही थी।चूंकि वर पक्ष आर्थिक रूप से सक्षम था लिहाज़ा लक्जरी वाहनों की कतार लग सकती थी लेकिन उसकी जगह बैलगाड़ी को ही क्यों चूना ,इसके जवाब में एक परिजन ने बताया कि हमारे पूर्वज बैलगाड़ी से ही बरात जाया करते थे,इसलिए हमने उसी परम्परा को दोहरा कर न केवल फिजूलखर्ची को कम करने का प्रयास किया बल्कि, वाहनों से होने वाले प्रदूषण को भी कम करने के प्रयास का संदेश दिया है।इसके साथ ही इस शादी में डीजे की जगह बैंड बाजा का प्रयोग कर ध्वनि प्रदूषण के खतरे के प्रति भी लोगों को आगाह किया गया है।

आधुनिक दौर में जब बैलगाड़ियों का इस्तेमाल नही के बराबर हो रहा है या फिर केवल सामान ढोने के लिए हो रहा है, 22 बैलगाड़ी और 44 बैलों की व्यवस्था आसान काम नही था। बरात के सदस्य महेंद्र प्रधान ने बताया कि आसपास के गांवों से 22 बैलगाड़ियां मंगाई गई थीं। सभी को पारंपरिक ढंग से सजाया गया।  गाड़ियों पर सोफा और गद्दे की व्यवस्था की गई थी। पूरी बारात प्रदूषण-मुक्त रही। न धुएं का गुबार, न कानफोड़ू शोर।शहर की सड़कों पर ऐसा दृश्य कम ही देखने को मिलता है, जहां उत्सव और पर्यावरण साथ-साथ चलें। दूल्हा आलोक ने माना कि वह अपनी शादी को खास बनाना चाहते थे, लेकिन यह इतना खास हो जाएगा,  इसकी कल्पना भी नहीं किया था।

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