‘हंगामा है क्यों बरपा, थोड़ी सी जो पी ली है , डाका तो नही डाला ,चोरी तो नहीं की है….’ शायद ऐसा ही कुछ सोच रहे थे दूल्हे राजा लेकिन यही थोड़ी से पीने की गलती ने सारा खेल बिगाड़ दिया और दुल्हन के कूचे से बड़े बेआबरू होकर दूल्हा को अपने घर वापस लौटना पड़ा। घटना बुधवार की रात सुपौल के त्रिवेणीगंज प्रखण्ड के मिरजावा , वार्ड संख्या 15, ठाकुर टोला की है। जहां वरमाला से पहले दुल्हन ने नशे में लड़खड़ाते दूल्हा के गले मे माला डालने से इनकार कर दी। इसके बाद तो हंगामा खड़ा हो गया और बरात की खूब फजीहत हुई। अंततः बिना दुल्हन के दूल्हा वापस लौट गया। लेकिन, ग्रामीणों के निर्णय के अनुसार, एक दूल्हे की तलाश मुक्कमल हुई और बहादुर बिटिया की शादी सम्पन्न हुई। हर कोई इस बहादुर बेटी के जज्बे और हिम्मत की तारीफ कर रहा है।
सिर पर पिता का साया नही, परिजनों के सहयोग से हो रही थी शादी
दुल्हन नेहा के पिता अब इस दुनिया में नहीं है। नेहा की शादी की जिम्मेवारी मां और भाई पर थी। मध्यस्थ की मदद से नेहा की शादी कटिहार जिला के फलका निवासी विलास ठाकुर के बेटे राजेश से तय हुई। चूंकि नेहा का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था, लिहाजा परिजनों के आर्थिक सहयोग से यह शादी सम्पन्न हो रही थी। लेकिन, बिना किसी संशय और भविष्य में होने वाली परेशानियों को दरकिनार कर नेहा ने शराबी दूल्हा से शादी से इनकार कर दिया। हालांकि, कुछ लोगों ने यह कहकर नेहा को समझाने की कोशिश किया कि ऐसे मौके पर दोस्तों के दवाब में संभव है दूल्हे ने थोड़ी सी पी ली होगी ,लेकिन नेहा अपने निर्णय पर अडिग रही और शादी स्थगित हो गई। चर्चा तो यह भी है कि दूल्हे ने दुल्हन के सामने भविष्य में फिर कभी नही पीने की कसमें भी खाई लेकिन वह नेहा का अटल-निर्णय साबित हुआ।
बराती फरार, दूल्हा के परिजन बने बंधक, उपहार की हुई वापसी
नेहा के निर्णय के बाद बरात और सरात खेमे में खलवली मच गई।दोनों पक्ष के बीच तनाव व्याप्त हो गया, नोकझोंक और धक्का-मुक्की भी हुई।स्थानीय लोगों के हस्तक्षेप से मामला संभल गया। इस कहासुनी के बीच अधिकांश बराती फरार हो गया। दूल्हा समेत उसके परिजनों को ग्रामीणों द्वारा रोक लिया गया। इसके बाद पंचायत हुई और दुल्हन पक्ष ने शादी पूर्व दिए गए उपहार को वापस करने की शर्त रखी। गुरुवार की शाम जब वर-पक्ष द्वारा उपहार सामग्री और नगद वधु पक्ष को वापस किया गया तब दूल्हे और परिजन को मुक्त किया गया।हालांकि, मानवीय आधार पर गुरुवार को पूरे दिन दूल्हा और परिजन को भोजन-पानी-चाय उपलब्ध कराया जाता रहा।
देवदूत बन आया वह युवक और दूल्हा बनकर थामा दुल्हन का हाथ
कहते हैं कि रिश्ते स्वर्ग में तय होते हैं। पता नहीं इसमें कितनी सच्चाई है, लेकिन इस मामले में तो जरूर सच के करीब दिखती है। चूंकि विवाह-मंडप तैयार था और सगे-सम्बन्धी भी मौजूद थे। लिहाज़ा सबों की राय से गुरुवार की रात नेहा की शादी सम्पन्न कराने का निर्णय लिया गया। सुयोग्य वर की तलाश युद्धस्तर पर शुरू हुई और एक परिचित युवक के नाम पर मुहर लग गई। मधेपुरा जिला के सिंहेश्वर प्रखण्ड के बेहरारी का युवक देवदूत बनकर आया और देर रात्रि नेहा की शादी सम्पन्न हो गई।

