सुप्रीम कोर्ट में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के विवादित ‘इक्विटी रेगुलेशंस 2026’ को लेकर बहुत महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीजेआई सूर्य कांत और जस्टिस जोयमाल्य बागची की खंडपीठ ने न केवल याचिकाओं पर विचार किया, बल्कि नए नियमों पर तत्काल प्रभाव से रोक (Stay) लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक मामले की गहराई से जांच नहीं हो जाती, तब तक 2026 के बजाय 2012 के पुराने नियम ही प्रभावी रहेंगे।
कोर्ट ने पूछा क्या देश 75 साल की संवैधानिक प्रगति के बाद वापस पीछे जा रहा है?
इस कानूनी लड़ाई में याचिकाकर्ताओं मृत्युंजय तिवारी, राहुल दीवान और अन्य की तरफ से एडवोकेट विष्णु शंकर जैन और विनीत जिंदल ने मुख्य रूप से पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि यूजीसी के नए नियम समानता के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन करते हैं। वहीं, केंद्र और यूजीसी की तरफ से सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने इन नियमों का बचाव करते हुए मोर्चा संभाला। कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या देश 75 साल की संवैधानिक प्रगति के बाद वापस पीछे जा रहा है? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को भारत की एकता का प्रतिबिंब होना चाहिए, न कि उन्हें जाति के आधार पर बांटना चाहिए।
कोर्ट ने पूछा- क्या जनरल कैटेगरी के छात्र के साथ भेदभाव नहीं हो सकता?
सुप्रीम कोर्ट ने नियम 3(c) पर आपत्ति जताई, जिसमें जातिगत भेदभाव को केवल SC/ST/OBC के खिलाफ भेदभाव के रूप में परिभाषित किया गया था। कोर्ट ने पूछा- क्या जनरल कैटेगरी के छात्र के साथ भेदभाव नहीं हो सकता? याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने तर्क दिया कि ये नियम ‘रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन’ (उल्टा भेदभाव) को बढ़ावा देते हैं और सामान्य वर्ग के छात्रों को संस्थागत सुरक्षा से वंचित करते हैं।
कोर्ट ने जताई नियमों के दुरुपयोग की चिंता
जस्टिस जोयमाल्य बागची ने टिप्पणी की कि नियमों की शब्दावली इतनी अस्पष्ट है कि इनका दुरुपयोग कैंपस में किसी के भी खिलाफ बदला लेने के लिए किया जा सकता है। CJI ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि इन नियमों की समीक्षा के लिए 2-3 प्रख्यात न्यायविदों की एक कमेटी बनाई जानी चाहिए, जो सामाजिक मूल्यों और समाज की बीमारियों को समझते हों।
उत्तर बनाम दक्षिण भारत का उदाहरण
CJI ने एक उदाहरण देते हुए पूछा कि अगर उत्तर भारत का छात्र दक्षिण भारत जाता है (या इसके विपरीत) और उस पर अपमानजनक टिप्पणी होती है तो क्या ये नए नियम उसे सुरक्षा दे पाएंगे? सुप्रीम कोर्ट ने राहुल दीवान, विनीत जिंदल और मृत्युंजय तिवारी द्वारा दायर याचिकाओं पर केंद्र सरकार और यूजीसी को औपचारिक नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
स्वायत्तता (Autonomy) और समानता का संतुलन
वकीलों ने बहस की कि ‘इक्विटी स्क्वॉड’ और ‘इक्विटी एंबेसडर’ जैसे प्रावधान कैंपस में निगरानी (Surveillance) का माहौल पैदा कर सकते हैं, जिससे छात्रों की आजादी प्रभावित होगी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 19 मार्च, 2026 की तारीख तय की है। तब तक यूजीसी को इन नियमों को लागू करने से पूरी तरह रोक दिया गया है।

