दक्षिण में ‘लालटेन’ की धमक! कन्याकुमारी में RJD का शक्ति प्रदर्शन, करुणानिधि-लालू की दोस्ती बदलेगी सियासी समीकरण?

उत्तर भारत की राजनीति में अपनी मजबूत पैठ रखने वाली राष्ट्रीय जनता दल (RJD) अब विंध्य पर्वत के पार दक्षिण भारत में अपनी जड़ों को विस्तार देने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। कन्याकुमारी में राजद की तमिलनाडु इकाई द्वारा आयोजित विशाल कार्यकर्ता सम्मेलन में समर्थकों का हुजूम उमड़ा, जिसने राजनीतिक गलियारों में एक नई चर्चा छेड़ दी है। समंदर के किनारे समर्थकों के नारों के बीच ‘लालटेन’ की यह रोशनी बिहार से हजारों किलोमीटर दूर तमिलनाडु के सियासी गलियारे को रोशन करने की कोशिश करती दिखी।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव की नजर अब उन बिहारी और उत्तर भारतीय प्रवासियों पर है जो तमिलनाडु के औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कार्यरत हैं। कन्याकुमारी का यह कार्यक्रम केवल एक सांगठनिक बैठक नहीं थी, बल्कि द्रमुक (DMK) और राजद के पुराने रिश्तों को जमीनी स्तर पर और मजबूत करने की एक कवायद थी। राजद यहाँ अपनी ‘ए-टीम’ यानी ‘M-Y’ समीकरण के साथ-साथ ‘A-2-Z’ की राजनीति को तमिल संस्कृति और सामाजिक न्याय के द्रविड़ मॉडल के साथ जोड़ना चाहती है।

कन्याकुमारी में राजद समर्थकों का यह जमावड़ा बीजेपी के ‘मिशन साउथ’ को सीधी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। कार्यक्रम में मौजूद वक्ताओं ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि जिस तरह बिहार में महागठबंधन ने सांप्रदायिक शक्तियों को रोका है, वही मॉडल तमिलनाडु में भी स्टालिन के नेतृत्व में प्रभावी होगा। राजद यहाँ खुद को एक ‘ब्रिज’ (पुल) के तौर पर पेश कर रही है, जो हिंदी भाषी वोटरों को द्रविड़ राजनीति के साथ जोड़ने में सक्षम है।

कार्यक्रम में तमिलनाडु के विभिन्न हिस्सों से आए राजद कार्यकर्ताओं ने पार्टी के झंडों और लालू-तेजस्वी के पोस्टरों से पूरे परिसर को पाट दिया। स्थानीय नेताओं ने तमिल भाषा में राजद के संकल्पों को दोहराया, जो यह संकेत देता है कि पार्टी अब केवल ‘प्रवासी कार्ड’ नहीं बल्कि स्थानीय सांगठनिक विस्तार पर भी ध्यान दे रही है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि तमिलनाडु में राजद की सक्रियता से इंडिया गठबंधन को उन सीटों पर लाभ मिल सकता है जहाँ प्रवासी आबादी निर्णायक भूमिका में है।

राजनीतिक प्रेक्षकों का कहना है कि यह आयोजन महज इत्तेफाक नहीं है। 2026 के विधानसभा चुनावों और आगामी राष्ट्रीय परिदृश्य को देखते हुए राजद अपनी अखिल भारतीय छवि (National Image) को पुख्ता करना चाहती है। कन्याकुमारी से शुरू हुई यह लहर चेन्नई तक कितनी प्रभावी होगी, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन इस भीड़ ने विपक्षी खेमों में हलचल जरूर पैदा कर दी है।

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