पूर्णिया विश्वविद्यालय में स्थापित वैचारिक पीठों (Chairs) की उपेक्षा का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। विश्वविद्यालय के शोधार्थी रवि गुप्ता ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वर्तमान कुलपति के कार्यकाल में राष्ट्र निर्माण में प्राणों की आहुति देने वाले महापुरुषों को भुलाया जा रहा है।
कुलपति की कार्यप्रणाली पर सवाल
शोधार्थी रवि गुप्ता ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वर्ष 2018 में विश्वविद्यालय में विभिन्न पीठों की स्थापना की गई थी ताकि युवाओं को महापुरुषों के विचारों से जोड़ा जा सके। पूर्व के कुलपतियों ने इन पीठों के माध्यम से जयंती और पुण्यतिथि के कार्यक्रम आयोजित कराए, लेकिन वर्तमान कुलपति के आने के बाद से एक भी कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया है। उन्होंने इसे महापुरुषों का अपमान करार दिया।
छात्रों ने खुद आयोजित की संगोष्ठी
विश्वविद्यालय द्वारा कार्यक्रम न किए जाने पर छात्रों और शोधार्थियों ने एकजुट होकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर उनके तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और एक संगोष्ठी का आयोजन किया।
एकात्म मानववाद और अंत्योदय की प्रासंगिकता
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए रवि गुप्ता ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का ‘एकात्म मानववाद’ आज के भौतिकवादी युग में और भी प्रासंगिक है। छात्र नेता कुंदन कुमार नंदन ने कहा कि पंडित जी ने हमेशा समाज के अंतिम व्यक्ति (अंत्योदय) की चिंता की, जिसके बिना राष्ट्र का विकास अधूरा है। वहीं, छात्र विकास कुमार ने युवाओं से अपील की कि वे शिक्षा को केवल नौकरी का साधन न मानकर राष्ट्र निर्माण का माध्यम बनाएं।
इस मौके पर शोधार्थी गौतम कुमार, सतीश कुमार, रोहित, मणिकांत, दीपक, राजन सहित दर्जनों छात्र मौजूद थे, जिन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।

