पटना । न्यूजस्टिच
पूर्णिया के निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की कानूनी मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। 31 साल पुराने धोखाधड़ी के एक मामले में राहत मिलने के कुछ ही घंटों बाद, पटना की एमपी-एमएलए कोर्ट ने उन्हें दो अन्य मामलों में न्यायिक हिरासत (कस्टडी) में भेजने का आदेश दिया है। कोर्ट के आदेश के बाद पप्पू यादव को वापस बेऊर जेल भेज दिया गया है।
क्यों नहीं मिली राहत? (बुद्धा कॉलोनी और कोतवाली केस)
दरअसल, मंगलवार को पप्पू यादव को 1995 के एक पुराने केस में जमानत मिल गई थी, लेकिन पुलिस ने दो अन्य मामलों में उनकी रिमांड मांग ली:
- कोतवाली थाना केस (2017): 27 मार्च 2017 को जन अधिकार पार्टी के बैनर तले बिजली दरों में बढ़ोतरी और BSSC पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान सरकारी काम में बाधा डालने और सड़क जाम करने का आरोप है।
- बुद्धा कॉलोनी केस (2026): हाल ही में 6 फरवरी की रात जब पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने पहुंची थी, तब समर्थकों द्वारा किए गए हंगामे और पुलिस से उलझने के आरोप में यह नया केस दर्ज किया गया है।
पप्पू यादव का जेल इतिहास: कब-कब गए सलाखों के पीछे?
पप्पू यादव का राजनीतिक सफर संघर्षों और कानूनी विवादों से भरा रहा है। यहाँ उनके प्रमुख जेल प्रवास और मामलों का ब्यौरा है:
- अजीत सरकार हत्याकांड (1998): यह उनके जीवन का सबसे चर्चित मामला था। माकपा नेता अजीत सरकार की हत्या के आरोप में पप्पू यादव को 2008 में उम्रकैद की सजा हुई थी। उन्होंने तिहाड़ और बेऊर जेल में कई साल बिताए। हालांकि, 2013 में पटना हाईकोर्ट ने उन्हें साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।
- बेऊर जेल मोबाइल कांड (2004): जेल में रहने के दौरान अस्पताल वार्ड से मोबाइल और ईयरफोन बरामद होने के मामले में उन्हें सजा सुनाई गई थी। इस मामले ने जेल प्रशासन की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े किए थे।
- लॉकडाउन उल्लंघन मामला (2021): कोरोना काल के दौरान 32 साल पुराने एक अपहरण के मामले (मधेपुरा) में पुलिस ने उन्हें अचानक गिरफ्तार कर लिया था। उस वक्त भी उन्हें काफी समय वीरपुर जेल और बाद में अस्पताल में बिताना पड़ा था।
- वर्तमान गिरफ्तारी (2026): 6 फरवरी 2026 की रात उन्हें 1995 के एक मामले (धोखाधड़ी से मकान किराए पर लेकर कब्जा करने) में गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद अब पुराने मुकदमों की फाइलें दोबारा खुल गई हैं।
कोर्ट में भावुक हुए सांसद
सुनवाई के दौरान पप्पू यादव कोर्ट में व्हीलचेयर पर नजर आए और काफी भावुक दिखे। उन्होंने जेल प्रशासन पर उचित इलाज न देने और साजिश रचने का आरोप लगाया। फिलहाल, 3 मार्च की तारीख उनके लिए अगली बड़ी कानूनी चुनौती होगी।

