लालू परिवार की तस्वीर

लालू परिवार की बढ़ी मुश्किलें? LARA प्रोजेक्ट मनी लॉन्ड्रिंग केस में बहस पूरी, राउज एवेन्यू कोर्ट इस दिन सुनाएगा फैसला

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के लिए अदालती गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आई है। दिल्ली की राउज एवन्यू कोर्ट ने LARA (लालू-राबड़ी) परियोजना से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपियों के खिलाफ आरोप तय (Framing of Charges) करने पर अपनी सुनवाई पूरी कर ली है। कोर्ट ने इस मामले में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है, जो अब 3 मार्च को सुनाया जा सकता है।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज इस मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव सहित कुल 16 लोग आरोपी हैं। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा। यदि 3 मार्च को कोर्ट आरोप तय करने का आदेश देता है, तो इस मामले में नियमित ट्रायल (मुकदमा) शुरू हो जाएगा।

इस मामले की जड़ें साल 2004-2009 के बीच की हैं, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। इसे मुख्य रूप से IRCTC होटल घोटाले और मिट्टी घोटाले के विस्तार के रूप में देखा जाता है।

  1. होटल के बदले जमीन: आरोप है कि रेल मंत्री रहते हुए लालू यादव ने IRCTC के रांची और पुरी स्थित दो होटलों (BNR होटल्स) के रखरखाव का ठेका ‘सुजाता होटल्स’ नामक निजी कंपनी को दिया। इसके बदले में कोचर बंधुओं ने पटना के सगुना मोड़ के पास बेशकीमती जमीन एक बेनामी कंपनी ‘डिलाइट मार्केटिंग’ को हस्तांतरित की।
  2. LARA Projects का उदय: बाद में ‘डिलाइट मार्केटिंग’ कंपनी का नाम बदलकर LARA Projects LLP कर दिया गया। इस कंपनी के मालिकाना हक में राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव का नाम शामिल हुआ।
  3. मॉल और मिट्टी घोटाला: इसी जमीन पर बिहार का सबसे बड़ा मॉल बनाया जा रहा था। विवाद तब गहराया जब मॉल के निर्माण के दौरान निकली मिट्टी को कथित तौर पर पटना के संजय गांधी जैविक उद्यान (चिड़ियाघर) को बिना किसी टेंडर के बेच दिया गया। इसे ही ‘मिट्टी घोटाला’ कहा गया, जिसने इस पूरे मामले की परतें खोल दीं।
  4. ED की कार्रवाई: ईडी का आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया मनी लॉन्ड्रिंग का हिस्सा थी, जिसमें आपराधिक तरीके से अर्जित संपत्ति को सफेद करने की कोशिश की गई। जांच एजेंसी ने इस मामले में मॉल की जमीन और अन्य संपत्तियों को पहले ही कुर्क (Attach) कर रखा है।

3 मार्च की तारीख लालू परिवार के लिए राजनीतिक और कानूनी तौर पर बेहद अहम होने वाली है। यदि कोर्ट आरोप तय करता है, तो लालू, राबड़ी और तेजस्वी को नियमित रूप से अदालती कार्यवाही का सामना करना पड़ेगा।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *