राजनीति के गलियारों में अक्सर सत्ता और दांव-पेच की खबरें सुनाई देती हैं, लेकिन बिहार सरकार के मंत्री और दिग्गज नेता रामकृपाल यादव ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऐसी दास्तान साझा की है, जिसने हजारों लोगों की आंखों को नम कर दिया। यह कहानी एक बड़े भाई के त्याग, एक अनाथ बचपन के संघर्ष और एक छोटे भाई की अटूट मेहनत की है, जो आज भारत की ‘नवरत्न’ कंपनी में जीएम (GM) के पद तक जा पहुँचा है।
डेढ़ साल की उम्र में सिर से उठा पिता का साया
मंत्री रामकृपाल यादव ने अपने फेसबुक पोस्ट के जरिए बचपन के उन काले दिनों को याद किया जब दुखों का पहाड़ उन पर टूटा था। उन्होंने बताया कि जब उनका छोटा भाई शिशुपाल रॉय महज डेढ़ साल का था, तब उनके पिता का निधन हो गया। अभी यह जख्म भरा भी नहीं था कि जब शिशुपाल 9 साल का हुआ, तब मां भी साथ छोड़ गईं। बेसहारा और कम उम्र में अनाथ हुए इन भाइयों के सामने अंधकार था, लेकिन रामकृपाल यादव ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने छोटे भाई के लिए बड़े भाई की जगह ‘मां-बाप’ की भूमिका निभाने का संकल्प लिया।
भाई नहीं, ‘बड़े बेटे’ की सफलता पर छलके आंसू
रामकृपाल यादव लिखते हैं, “तब से लेकर आज तक मैंने शिशुपाल को भाई नहीं, बल्कि अपना बड़ा बेटा ही समझा है।” आज वही छोटा भाई भारतीय रेलवे के अंतर्गत आने वाली नवरत्न कंपनी CONCOR में जनरल मैनेजर (GM) बन गया है। एक पिता को अपने पुत्र की सफलता पर जो गर्व और संतोष महसूस होता है, वही भावुकता आज मंत्री जी के शब्दों में साफ झलक रही है।
संयुक्त परिवार की ताकत
आज के दौर में जहां परिवार बिखर रहे हैं, रामकृपाल यादव गर्व से कहते हैं कि उनका परिवार तब भी संयुक्त था और आज भी है। यह सफलता केवल शिशुपाल की नहीं, बल्कि उस संस्कार और परवरिश की है जो अभावों के बीच भी भाईचारे और नैतिकता से सींची गई थी। शिशुपाल रॉय की यह नियुक्ति उनके अनुभव और भारतीय कंटेनर शिपिंग क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान का परिणाम है।
बड़ा पद, बड़ी जिम्मेदारी
भावुक पत्र के अंत में एक बड़े भाई और पिता की तरह रामकृपाल यादव ने सीख भी दी। उन्होंने कहा कि बड़ा पद अपने साथ बड़ी जिम्मेदारियों को भी लेकर आता है। उन्हें पूरा विश्वास है कि शिशुपाल अपनी क्षमता और मेहनत से देश के विकास में नए कीर्तिमान स्थापित करेगा। यह कहानी हमें सिखाती है कि यदि इरादे नेक हों और अपनों का साथ हो, तो बचपन की कंगाली और अनाथ होने का दुख भी आपको आसमान छूने से नहीं रोक सकता।

