मुजफ्फरपुर और पटना के महापाप क्यों नहीं दिखते? रोहिणी आचार्य का नीतीश सरकार पर कसा तंज, ‘लेडी धृतराष्ट्र’ की दी संज्ञा

बिहार की सियासत में महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर वार-पलटवार का दौर तेज हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक लंबा और बेहद तीखा पोस्ट साझा कर सत्तापक्ष को कटघरे में खड़ा किया है। रोहिणी ने न केवल सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए, बल्कि सत्तापक्ष की एक युवा महिला विधायक (बिना नाम लिए) को ‘लेडी धृतराष्ट्र’ तक कह डाला।

रोहिणी आचार्य ने अपने पोस्ट की शुरुआत बिहार में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर गहरी चिंता जताते हुए की। उन्होंने लिखा कि बिहार में लगभग हर रोज बेटियों और बहनों की इज्जत लूटी जा रही है और यह अब एक डरावने सिलसिले का रूप ले चुका है। रोहिणी का आरोप है कि इस मुद्दे पर बिहार के हर कोने से सवाल उठ रहे हैं, लेकिन सत्तापक्ष की ओर से कभी भी कोई ‘माकूल’ या संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। उन्होंने सदन के भीतर की स्थिति पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जब विपक्ष के माननीय सदस्य जनता की आवाज उठाते हैं, तो सरकार उचित जवाब देने के बजाय घिसे-पिटे डायलॉग पढ़ती है। रोहिणी के अनुसार, सरकार का मुख्य मकसद असल मुद्दों से ध्यान भटकाना होता है।

रोहिणी आचार्य ने सत्तापक्ष की एक महिला विधायक पर निशाना साधते हुए उन्हें ‘नौसिखिया’ करार दिया। उन्होंने लिखा कि सदन में जब उस सदस्या को अपने जन्म से पहले के शासनकाल (35-36 साल पुरानी बातें) के बारे में ‘झूठ का पुलिंदा’ पढ़ते हुए देखा जाता है, तो उनके विवेक पर तरस आता है। रोहिणी ने सवाल उठाया कि जो घटनाएं उनके जन्म से पहले की हैं और जिनका कोई सबूत नहीं है, उन पर तो वे खूब बोलती हैं, लेकिन उनके होश संभालने के बाद जो ‘महापाप’ हुए, उन पर वे मौन क्यों हैं?

अपने पोस्ट में रोहिणी ने कई बड़ी घटनाओं का जिक्र कर सरकार को घेरा। उन्होंने पूछा कि क्या सत्तापक्ष को मुजफ्फरपुर का वह भयावह ‘महापाप’ नहीं दिखता? क्या हाल ही में पटना में नीट (NEET) की तैयारी कर रही छात्रा के साथ हुई दरिंदगी और उसकी निर्मम हत्या नजर नहीं आती? रोहिणी ने आगे लिखा कि दरभंगा में 6 साल की मासूम बच्ची के साथ हुई हैवानियत पर सत्तापक्ष की चुप्पी उनकी संवेदनहीनता को दर्शाती है।

रोहिणी ने अपने हमले को और तेज करते हुए उक्त महिला विधायक की तुलना ‘धृतराष्ट्र’ से कर दी। उन्होंने लिखा कि जो घटनाएं आज घटित हो रही हैं, उन्हें न देख पाने और उन पर चुप्पी साध लेने से वह सदस्या खुद को ‘लेडी धृतराष्ट्र’ की श्रेणी में स्थापित करने को लालायित दिखती हैं। उन्होंने तंज कसा कि अतीत की काल्पनिक कहानियों को देख पाने के लिए उन्हें जरूर कहीं से ‘प्रायोजित अंतर्दृष्टि’ प्राप्त हुई है, जो वर्तमान के जख्मों को देखने में पूरी तरह विफल है।

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