चतरा/रांची। न्यूजस्टिच
झारखंड के चतरा जिले के कसियातु जंगलों में सोमवार की रात जो चीखें दफन हुई थीं, मंगलवार की सुबह वे मलबे से निकलते शवों के साथ बाहर आईं। रांची के देवकमल अस्पताल से दिल्ली के लिए ‘मिशन लाइफ’ पर निकली एयर एंबुलेंस (Beechcraft C90) अब लोहे के ढेर में तब्दील हो चुकी है। हादसे वाली जगह पर विमान के ईंधन (Fuel) की तीखी गंध और परिजनों के विलाप ने पूरे इलाके के सन्नाटे को मातम में बदल दिया है।
रेस्क्यू पूरा: मलबे से निकाले गए सभी 7 शव
मंगलवार सुबह जिला प्रशासन और पुलिस बल ने घंटों की मशक्कत के बाद सभी 7 शवों को बरामद कर लिया है। शुरुआती घंटों में 5 शव निकाले गए थे, जबकि 2 शव विमान के मलबे के बीच बुरी तरह फंसे हुए थे। घटनास्थल पर मौजूद पुलिस अधिकारियों के अनुसार, विमान के गिरने की तीव्रता इतनी अधिक थी कि शवों की पहचान करना भी चुनौतीपूर्ण हो गया था।
भावुक कर देने वाला दृश्य: इकलौता बेटा और बिखरते सपने
हादसे की खबर मिलते ही विमान के पायलट विवेक के परिजन घटनास्थल पर पहुंचे। जैसे ही उन्होंने विवेक का शव देखा, जंगल उनके चित्कारों से गूंज उठा। विवेक अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। एक तरफ एक परिवार अपने मरीज (संजय कुमार) को बचाने की आखिरी उम्मीद में दिल्ली जा रहा था, तो दूसरी तरफ एक होनहार पायलट अपनी ड्यूटी निभा रहा था—किंतु नियति ने दोनों ही परिवारों के चिराग बुझा दिए।
DGCA और AAIB की कार्रवाई: रडार से हटने के वो आखिरी मिनट
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने पुष्टि की है कि विमान ने रात 19:11 बजे रांची से टेक-ऑफ किया था।
आखिरी बातचीत: रात 19:34 बजे पायलट ने कोलकाता ATC को सूचना दी कि मौसम खराब है और वे रास्ता बदलना (Deviation) चाहते हैं।
हादसे का केंद्र: वाराणसी से 100 नॉटिकल मील दूर अचानक रडार से संपर्क टूट गया और विमान चतरा के जंगलों में समा गया।
जांच टीम रवाना: दिल्ली से AAIB (एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो) की एक उच्चस्तरीय टीम सुबह 8:30 बजे रवाना हो चुकी है। यह टीम दिल्ली से गया (बिहार) लैंड करेगी और वहां से सीधे चतरा पहुंचेगी। जांच का मुख्य केंद्र विमान का ‘ब्लैक बॉक्स’ होगा, जिससे यह पता चलेगा कि क्या इंजन में कोई तकनीकी खराबी थी या फिर सिर्फ खराब मौसम ही इस तबाही की वजह बना।
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